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Sunday, 1 March 2015

Lesson - 13 Desh Prem Kaa Daam!

देशप्रेम का दाम

१.  यह कहानी ककब की है और भारत के किस राज्य की है?

इस कहानी में १९४२ के भारतीय आंदोलन का उल्लेख है।  यह उड़ीसा राज्य से सम्बंधित है।

२  नारायण बाबू बीमार बच्चे को छोड़कर क्यों ना जा सके ?

नारायण बाबू बीमार बच्चे को छोड़कर इसलिए न जा सके क्योंकि उनका ह्रदय पुत्र-स्नेह से द्रवित हो उठा था।

३ पत्नी की मृत्यु के बाद नारायण बाबू ने सनातन की परवरिश कैसे की ?

पत्नी की मृत्यु के बाद नारायण बाबू ने बड़ी कठिनाइयों से सनातन की परवरिश की।

  और बहु ने नारायण बाबू से कहाँ - कहाँ सिफारिश करने को कहा ?

नारायण बाबू के बेटे ने मंत्री से यूनियन की सिफारिश तथा बहु ने मातृ से ट्रांसफर  कैंसल करने के लिए कहा। 

दीर्घउत्तरीय प्रश्न उत्तर

१   नारायण बाबू कैसे पकड़ा गया ?

नारायण बाबू के बेटे तेज़ बुखार से तप रहा ठाट तथा सैदामिनी बेटे की हालत देखकर घबरा रही थी।  नारायण बाबू का ह्रदय पुत्र - स्नेह से पिघल गया।  पिता के वात्सल्य तथा कर्त्तव्य के आगे देशप्रेम हार गया। वे घंटेभर में वहां से चले जाने का निर्देश भूल गए. रातभर ठहरकर उन्हें तब ध्यान आया जब प्रात: पुलिस ने उनका मकान घेरकार्सिटी बजाई।

२   नारायण बाबू आधी रात में घंटे - दो घंटे के लिए ही क्यों घर आ पाते थे ?

नारायण बाबू अँगरेज़ सरकार के विरुद्ध जगजोग्रं के उद्देश्य से भूमिगत हो गए थे।  छद्मवेश में वे वेश बदलकर उड़ीसा के एक छोर  से दूसरे छोर  तक आज़ादी के लिए लोगों को जागरूक कर रहे थे।  अँगरेज़ सरकार ने उनपर हज़ार रूपये के इनाम की घोषणा की थी। इन्हीं कारणों से नारायण बाबू घंटे - दो घंटे के लिए ही घर आ पाते थे।

३  सनातन और मधुमिता नारायण बाबू से क्या अपेक्षा कर रहे थे ?

सनातन और मधुमिता नारायण बाबू से यह अपेक्षा कर रहे थे कि  वे देश को  बाद सरकार से पैसे मांगेंगे और उन पैसों को वे बांटकर सुखी जीवन जी सके, लेकिन नारायण बाबू ने सरकार से पैसे नहीं माँगे।

४  सनातन और मधुमिता के स्वभाव में आए परिवर्तन का क्या कारण था ? इससे उनके चरित्र के कौन - सा पक्ष उजागर होता है ?

जब दिल्ली से यह पात्र आया कि  केन्द्रीय सरकार ने नारायण बाबू को जीवनभर के लिए ५०० रुपए महीने का भत्ता देने का निर्णय कर लिया है तो सनातन और मधुमिता के स्वभाव में परिवर्तन आ गया।  इससे यह पता चलता है कि  आज के समय में पैसा ही सब कुछ है , रिश्ते - नातों का कोई मूल्य नाहिंन।  इससे यह भी पता चलता है कि  जो व्यक्ति अतीत के त्याग को पूंजी बनाकर वर्तमान के भोग की सामग्री नहीं जुटाता, उसे लोग असफल तथा असमर्थ ही मानते हैं।

५  आज़ादी के बाद देशवासियों का चरित्र क्यों बदल गया ? विस्तार में लिखिए।

स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वतन्त्र भारत की जो तस्वीर देखि थी, स्वतंत्रता मिल जाने के बाद, बदली हुई स्तिथियों में कोई अलग ही तस्वीर नज़र आई।  महात्मा गांधी के सपनों का भारत कहीं खो गया।  इसी कारण अनेक स्वतंत्रता सेनानी भी निजी स्वार्थ के खातिर देश की सत्ता हथियाने की सोचने लगे , जिस कारण वे चुनाव भी लड़ने लगे।

६  आपकी परतंत्र भारत में अंग्रेज़ों के प्रति क्या भूमिका होती ? आप देश के लिए क्या करते ?

हम अंग्रेज़ों द्वारा किए जा रहे अत्याचार और दमन का विरोध करते।  समाज के अनेक अंगों से उनके विरुद्ध जनमत तैयार करते।  असहयोग और सत्याग्रह  के द्वारा अपना विरोध प्रकट करते।  यदि परिस्थितियों की आवश्यकता होती तो क्रांति भी करते। 

 ऐसा क्यों कहा गया है कि  …। 

क.   नारायण नदास को अनुमान हो गया कि  बेटे के साथ सम्बन्ध इशी क्षण टूट गया। 

जब नारायण बाबू ने सनातन की इस बात से इंकार कर दिया कि  वे स्वतन्त्र सेनानी रह चुके श्रम मंत्री से उसकी यूनियन की सिफारिश नहीं करेंगे तो सनातन के क्रोधित होने पर उन्हें यह आभास हो गया कि  बेटे के साथ उनका सम्बन्ध टूट गया। 

ख.  अपने परिवार में नारायण दास बिलकुल नई:संग, अनावश्यक और फ़ालतू चीज़ की तरह उपेक्षित पड़े रहते। 

जब्ब नारायण बाबू ने अपनी बहु मधुमिता को स्पष्ट  कर  उसका ट्रांसफर  की मंत्री जी से सिफारिश नहीं  मधुमिता  अपनी ममता का   बंधन दूर कर लिया।  पुत्र सनातन तो पहले से ही क्रोधित हो कर सम्बन्ध तोड़ चुका था।  इस घटना के बाद वे बुल्कुल नई:संग, फ़ालतू चीज़ के जैसे पड़े थे। 

ग.  बहू की बात सुनकर नारायण दास की छाती में हुक - सी उठी।  तन-मन दर्द से भर गया। 

जब नारायण बाबू ने निर्लिप्त-भाव से मृत्यु से निडर होकर वरण करने की बात कही तो मधुमिता द्वारा यह बताने पर की सरकार ने उन्हें ५०० रुपए महीना भत्ता देना मंज़ूर किया है, उनके हृदय में हुक - सी उठी। 

जीवन मूल्य परक प्रश्न -उत्तर 

प्र।   हम सत्ता और शक्ति के पीछे क्यों दौड़ते रहते हैं ?

उ  देशप्रेम नई:स्वार्थ होता है।  सत्ता और शक्ति के पीछे दौड़नेवाले स्वार्थी होते हैं. उनका देशप्रेम दिखावा मात्र होता है।  वह हमें प्रभावित करने के किए होता है ताकि हम सत्ता तक पहुँचने में उनकी मदद करें।  इसलिए वे सत्ता में पहुँचते ही केवल अपने और अपनों के हित -साधन में जुट जाते हैं। 

वे हम जैसे को साक्षात तो दूर की बात, सपने में भी देखना पसंद नहीं करते।  दूसरी ओर  जो सच्चे देशप्रेमी होते हैं , उन्हें अपने या अपनों की कोई फ़िक्र नहीं होती। 

सच तो यह है कि  हम सभी ही उनके अपने होते हैं. वे तो सत्ता पाना ही नहीं चाहते।  इन दिनों हमारे बीच इसका जीता-जागता उदाहरण हैं - अन्ना हज़ारे। 

बस. ख़त्म। 

बाकी बाद में। 

सबकी दोस्त,

लक्ष्मी।  :-)))

तरुवर फल नहीं खात  है , सर्वर पियहि न पान। 
कहीं  रहीम परकाज हित , संपत्ति सँचहि सुजान। 

 

Saturday, 28 February 2015

Lesson - 12 Saarnaath!

पाठ - १२ 

प्र १   सारनाथ भारत के किस राज्य में है ?

उ.    सारनाथ भारत के उत्तर प्रदेश में स्तिथ है। 

प्र  .  सारनाथ की दो विशेषतायें बताइए। 

 उ  गौतम बुद्ध ने अपना धर्म चक्र प्रवर्तन यहीं पर किया था। . 

        यहाँ अशोक द्वारा निर्मित सिंह शीर्षवाला स्तम्भ, अनेक स्तूप तथा विहार है। 

प्र।   गौतम बुद्ध का सारनाथ से क्या सम्बन्ध था ?

उ   गौतम बुद्ध का सारनाथ से घनिष्ठ सम्बन्ध ठाट क्यूंकि उन्होंने अपना धर्म चक्र प्रवर्तन यहीं किया था। 

अशोक  स्तम्भ के विषय में अलग - अलग क्या मत थे ?

अशोक स्तम्भ के ऊपरी भाग को किसी विद्वान ने उलटा कमल का फूल कहा है , तो किसी ने फारस का घंटा कहा है।  इतिहासकारों ने इसे कला का उत्तम नमूना कहा है। 

दीर्घउत्तरीय प्रश्न - उत्तर 

१    बौद्ध धर्म की यह एक महान घटना -   किस घटना की बात की जा रही है ?

 करने के उद्देश्य से गौतम बुद्ध ने घर छोड़ दिया।   शिष्य बने किन्तु उनके ज्ञान प्राप्ति के मार्ग को गलत समझकर उन्हें बोधगया में अकेले छोड़कर भाग गए।   फिर तपस्या के बाद जब बुद्ध को  ज्ञान प्राप्ति हुई तो उन्होंने  उन्ही पांच शिष्यों को सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया।  यही बौद्ध धर्म की एक महान घटना थी। 

२।   सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म का अनुयायी बनने के बाद क्या किया ?

जब मौर्य सम्राट अशोक बौद्ध धर्म का अनुयायी बना तो सारनाथ, साँची, दिल्ली, कौशाम्बी, लुंबनी, वैशाली, लोरियानंदनगढ़ आदि स्थानों पर स्तम्भ बनवाए।  इनमे से सबसे प्रमुख अशोक स्तम्भ है। 

अशोक स्तम्भ की विशेषतायें विस्तार ममे लिखिए ?

इस स्तम्भ का शीर्ष भाग चार सिंहों से युक्त है।  सिंहों के मुंह  से विपरीत दिशा में हैं, किन्तु पीठ आपस में ऐसे सटी हैं मानो एक ही हों। 

 बीच में एक चक्र है जो धर्म चक्र का सूचक है। 
सिंहों की मूंछें, नेत्र, आयल और खुले हुए मुख अस्वाभाविक होते हुए भी प्रभावशाली है। 
चक्र के पास अश्व, मृग, सांड और हाथियों की मूर्तियां यहां खड़ी  हैं। 

३.  सिंह प्रतिमा की प्रशंसा करते हुए इतिहासकारों ने क्या कहा ?

इतिहासकारों ने सारनाथ की इस प्रतिमा को भूरि - भूरि प्रशंसा की है।  इनमे उच्च भावनाओं की झलक मिलती है।  इस स्तम्भ की विशेषता है कि  यह एक ही पत्थर से बन्नी है और इसे अत्यंत पॉलिश  की गई है।  यह पॉलिश  बाद की मूर्तिकला से हमेशा के लिए लुप्त हो गई है। 

४.  सारनाथ में मिली दो मूर्तियां की विशेषतायें बताइए। 

सारनाथ में मिली दो मूर्तियां है।  पहले वाली कनिष्क के काल की एक विशाल बोधिसत्व प्रतिमा है और दूसरी गुप्तकाल की एक सुन्दर धर्म चक्र प्रवर्तन की मुद्रा में भगवान बुद्ध की मूर्ति है।  यह बुद्ध की मूर्ति न केवल हमें न केवल बाहर से आकर्षित करती है बल्कि अपनी भीतरी सुंदरता से भी हमें आकर्षित करती है। 

५ अशोक स्तम्भ के कौन से चिह्न किन अलग - अलग रूप में उपयोग में लाए जाते हैं। 

अ  अशोक स्तम्भ के ऊपर बने चार शेर सरकार द्वारा जारी मुद्रित मुद्रा (सिक्कों तथा नोट) पर अंकित हैं। 
आ अशोक स्तम्भ के सिंहों के बीच बना चक्र तिरंगे झंडे के मध्य में स्तिथ है। 
ई अशोक स्तम्भ के ऊपर बने चार शेर सरकार प्रपत्रों पर अंकित होते हैं। 
ई इस स्तम्भ के ऊपर बने चार शेर सरकारी मुहर में अंकित होते हैं। 
उ सरकारी डाक - टिकट पर भी इस स्तम्भ के ऊपर बने चार शेर अंकित होतें हैं। 
उ अशोक स्तम्भ का चक्र तीनों सेनाओं के सैनिकों की वर्दी पर भी अंकित हैं। 

जीवन मूल्य परक प्रश्न 

आप अशोक होते तो प्रजा के लिए क्या कुछ करते ? लिखिए  स्मृति बनाए रखने के लिए आप क्या - क्या करते ?

 मैं अशोक होता तो आरम्भ से ही अहिंसा धर्म का पालन करता।  सम्राट का पद पाने के लिए युद्धों में वीरों का खून न बहाता।  तब उन युद्धों के खर्च के लिए प्रजा को अतिरिक्त करों का भार धोने पर मजबूर नहीं होना पड़ता।  नै पीढ़ी को शिक्षित करने के लिए स्मारकों के स्थान पर पाठशालाएं बनवाता।  शिलालेखों के स्थान पर विद्या से सम्बंधित कुछ खुदवाता। 

सबकी दोस्त ,

लक्ष्मी :-)))

Thursday, 29 January 2015

Hindi - Grammar Bit!

Page - 127

व्याकरण

अपराध  -  crime

पाप  - sin

अपराध जाने या अनजाने में हो सकता है।  उसका दंड निश्चित है, किन्तु पश्चाताप और दंड के भुगतने से ख़त्म हो जाता है किन्तु , पाप किसी की नज़र में आए या ना आए वह पश्चाताप करने या दंड भुगतने पर भी नहीं मिटता।

हत्या करना अपराध है पर किसी को बहुत दुःख देना पाप है। 

अमूल्य - priceless

बहुमूल्य - expensive

जीवन अमूल्य है वरन हीरा बहुमूल्य  है।

आज्ञा - order  given  by  a  loved  one  or  a respectable person .

आदेश - order  which is compulsory to follow .

गुरु या बड़ों की आज्ञा , सरकारी आदेश

राजा - king

सम्राट - emperor

अकबर भारत के सम्राट थे उनके राज्य के अधीन कई राजाओं का राज्य था।

2.

हुक्म  -  आदेश

लाश -  शव

लफ्ज़  -  शब्द

शाही  -  राजसी

तबीयत   - स्वास्थ्य

हिफाज़त - सुरक्षा

नापाक - अपवित्र

हकीम  - सभी ठीक हैं

 

Saturday, 17 January 2015

Hindi FA - 4 vyaakaraN

ज्ञान प्राप्ति    -  ज्ञान की प्राप्ति

धर्म - चक्र     -  धर्म का चक्र

वनगमन      -    वन को गमन

गुणहीन  -  गुण  से हीन

पवनपुत्र  -  पवन का पुत्र

देशप्रेम -  देश से प्रेम


परलोक को गमन   -  परलोकगमन

गुरु के लिए व्यय  - गुरुव्यय

गंगा का जल  - गंगाजल

अकाल से पीड़ित  - अकालपीड़ित

ऋण  से मुक्त  - ऋणमुक्त

नगर में वास - नगरवास


फूल  -  कमल

हाथी  - हरित

घर  -  ग्रह

सिंह  -  शावक 

अश्व  -  सरपट

नेत्र  -  नयनतारा

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व्याकरण  - बोध

क।     सज्जन मान जाते हैं।

ख      आप सपरिवार हमारे घ आइए।

ग      दूध स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।

घ      राम सीता को देखकर प्रसन्न हुए।

ङ       यदि वेतन मिले तो मैं  रुपए लौटा दूंगा।


आदर    -   सादर   ,   अनादर    निरादर

कर्म    -   कर्मठ   ,   दुष्कर्म  ,    निष्कर्म 

ज्ञान   -  विज्ञान  ,   ज्ञान ,  ज्ञानी

तंत्र  -  परतंत्र  ,  स्वतन्त्र  ,  तांत्रिक

Everyone's friend,

Lakshmi R. Srinivasan. :-)))

Thursday, 20 November 2014

Lesson - 11 Bhaarat Gaan

भारत - गान

मौखिक प्रश्न  - उत्तर
 
क.  ' सारे जगत को अपना परिवार मानता है'.
ख.  'धरती पर स्वर्ग की कल्पना है यदि कहीं पर'.
ग.  ' दे चंद्रयान नारा अपना महान भारत ' . '

उ.  क.  'वसुधैव कुटुम्बकम' यानी पूरा विश्व ही एक कुटुंब है , कुम्बा है, परिवार है. ऐसा भारतीय लोग तब कल्पित कर चुके थे जब ' ग्लोबल विलेज' या 'ग्लोबलाइज़ेशन ' जैसा शब्द किसी के ध्यान में न आए होंगे. विश्वग्राम और वैश्वीकरण के बारे में किसी ने सोचा तक ना था।

ख. ऐसा कहा और माना जाता है कि  स्वर्ग में सब सुख होते हैं।  हरियाली होती है, झीलें होती है, फूलों से लड़े बाग़ होते हैं।  देवता शिकारों में बैठ कर जल - विहार करते हैं. यह सब स्वर्ग के रूप में कश्मीर में है।  सो कह सकते हैं कि  धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है, तो वह कश्मीर में है।

ग.  भारत का चंद्रयान नामक अंतरिक्षयान चन्द्रमा तक पहुँचने में सफल रहा है।  इससे दुनिया को अंतरिक्ष विज्ञान क्षेत्र में हमारी क्षमताओं का पता चल गया।  वह दिन दूर नहीं अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धानिक, वैज्ञानिक, अन्य ग्रहों तक अंतरिक्ष यान  भेजेंगे।

दीर्घउत्तरीय प्रश्न उत्तर

१.  भारत को' धरती का स्वर्ग' क्यों कहा जाता है ?

उ.  भारत की भौगोलिक स्तिथि, सांस्कृतिक वैभव, ऋतू - परिवर्तन , रीती - रिवाज़ आदि की उत्कृष्टता, इसे अन्य देशों से अलग स्थापित करती है।  यहां अनेक नदिया धरती को उर्वर बनाए रखती हैं , तो पर्वत श्रृंखलाएँ  ऋतू - चक्र को प्रभावित करती हैं।  यहां की भौतिक और बौद्धिक सम्पदा से पाश्चात्य देश सदा आकर्षित होते रहे हैं।  यहां के प्राकृतिक दृश्य सहज ही सब का मन मोह लेते हैं।  इसी आधार पर भारत को धरती का स्वर्ग कहा गया है। 

२.  हमें किनका ऋणी होना चाहिए और क्यों ?

उ.  कविता के आधार पर कहा जा सकता है कि  जिस किसी ने भी भारत को समृद्ध करने के लिए अपना बलिदान दिया, हमें उन सबका ऋणी होना चाहिए. जैसे सैनिक, वैज्ञानिक, राजनितिक, विचारक, दार्शनिक आदि।

३.  'जल, जीव और जीवन-संभावना शशि पर' भावार्थ स्पष्ट कीजिए।

उ.  इससे कवि ने चंद्रयान के माध्यम से भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों की ओर  संकेत किया है।  वे कहना चाहते हैं कि  वह दिन दूर नहीं जब हमारे वैज्ञानिक चन्द्रमा पर जा-जीव और जीवन खोजकर बस्तिया बनाने में सफल होंगे। 

४.  कल्पना और सुनीता कौओं हैं ?

उ.  कल्पना चावला करनाल की रहने वाली थीं।  वे 'नासा' की ओर  से एक बार अंतरिक्ष में हो आई थीं।  वे अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला बनीं।  उन्हें पुन : स्पेस में जाने के लिए चुना गया था।  दुर्भाग्यवश  दूसरी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान अंतरिक्षयान के क्षतिग्रस्त हो जाने से उनकी मृत्यु हो गई।  इसी प्रकार सुनीता विलियम्स चाँद पर कदम रखने वाली दूसरी भारतीय्या महिला थीं। 

जीवनमूल्यपरक प्रश्न - उत्तर

१.  भारत के नागरिक होने के कारण आपके कुछ अधिकार भी हैं तो कर्त्तव्य और ज़िम्मेदारी भि. आप उन्हें कैसे पूरा करना चाहेंगे ?

उ.  किसी भी नागरिक को उसके देश का संविधान कुछ मौलिक अधिकार देता है तो उससे कुछ कर्तव्यों का पालन करने की आशा भी करता है।  भारत का नागरिक होने के नाते मुझे छ : मौलिक अधिकार प्राप्त हैं, जिनका मैं निर्भय होकर  उपयोग कर सकता हूँ।  इसी के साथ मेरे कुछ कर्त्तव्य भी हैं , जैसे , अपने राष्ट्रीय रतिकों का सम्मान करना , अपने संविधान की मर्यादा का पालन करना, अपने किसी भी कार्य से अपने राष्ट्र की छवि धूमिल होने का अवसर न देना , देश में आतंरिक अमन - शान्ति बनाए रखने में अपना योगदान देना, राष्ट्रीय संपत्ति को क्षति न पहुंचाना. सुसभ्य नागरिक की तरह आचरण करके और शांतिप्रिय सहरी की तरह  जीवनयापन करना चाहिए। 

बस ख़त्म।

सबकी दोस्त ,

लक्ष्मी आर श्रीनिवासन।  :-)))

Wednesday, 27 August 2014

Lesson - 8

मुंबई की बरसात 
 
 
प्र   १   घर के भीतर पानी भर जाने का एहसास लेखक को कब हुआ ?
 
उ   १   घर के भीतर पानी भर जाने का एहसास लेखक तो तब हुआ जब नींद में उनकी एड़ियों तथा पिंडलियों को अचानक ठंडे  - ठंडे  पानी ने छूना  शुरू किया। 
 
प्र    २  पानी भरता देख लेखक ने क्या किया ?
 
उ   २   पानी भरता देख लेखक ने पतला-सा बिछौना कपड़ों में दबाया तथा किताबें, कागज़ और अपने कपडे पेटी  में रख लिए।  इसके पश्चात वे वहां से निकलने के विषय में सोचने लगे ।  
 
प्र    ३  डोंगी में कौन था ?
 
उ    ३ डोंगी में गौतम पाल था।  वह हाथ से इशारा कर के लेखक को बुलाने लगा।  लेखक हिम्मत बटोरकर चलने लगे , किन्तु पानी की तेज़ बौछारों तथा हवाओं के कारण उनके पाँव कांपने लगे।  तब गौतम  छतरी लेकर पानी में उतरा और लेखक के निकट पहुंचकर उनका हाथ पकड़ लिया।  लेखक फिर गौतम के साथ डोंगी तक पहुंचे । 
 
प्र   ४  डोंगीवाले पानी में फँसे  लोगों की मदद कैसे कर रहे थे ?
 
उ  ४  डोंगीवाले जिस घर के निकट से भी गुज़र रहे थे, वहाँ  वे चिल्ला - चिल्ला कर लोगों को सूचना  दे रहे थे कि  वे लोगों को बाड़े की तरफ़  ले जा रहे हैं।  वे चाहते थे कि  यदि कोई पानी में फँसा  हो तो उनकी आवाज़ सुनकर उन्हें सहायता के लिए पुकारें ताकि वे उनकी मदद कर सकें। 
 
प्र   ५  नाव में पानी भर जाने पर सवारियों ने क्या किया ?
 
उ   ५  नाव में पानी भर जाने पर सवारियाँ  बाल्टी में पानी भरकर उसे बाहर फेंक रहीं थीं । 
 
प्र    ६  पानी बारिश में आपके आस - पास कैसी स्तिथि बन  जाती है ? अपने  शब्दों में लिखिए। 
 
उ  ६   घनी बारिश में आस - पास के पेड़ धुलकर साफ़ - सुथरे दिखाई देते हैं।  सड़कों के किनारे पानी इकठ्ठा हो जाने से कीचड़ हो जाता है।  सड़कों पर ट्राफिक रुक जाता है और बिजली गुल हो जाती है।  घनी बरसात में स्कूलों की छुट्टी हो जाती है। 
 
 
जीवनमूल्यपरक प्रश्न उत्तर 

 
प्र    १   बहुत ज़्यादा बरसात होने से आपके घर में पानी भर गया है , बाहर भी पानी है।  क्या आप खुद को बचातें हुए दूसरों को बचाना चाहेंगे?
 
उ   १  
 
क     आदमी घर, सड़क से कुछ ऊंचाई पर ही बनाता है।  नगर - निगम वाले सड़क की मरम्मत के नाम पर हर बार उस पर तारकोल की एक नई परत चढ़ा देते हैं।  इससे होता यह है कि  ज़्यादा बारिश होने पर पानी कभी भी घरों में भर जाने की स्तिथि बन जाती है। 
 
ख     ऐसा होने से सबसे पहले हम अपने घर के मुख्य दरवाज़े पर रेत  की बोरियां लगाएंगे। 
 
ग     जब बरसात थम जाएगी , तो गली में पानी बहा देंगे। 
 
घ    सभी घरों के लिए पक्के इंतज़ाम करने के इरादे से प्लंबर और मिस्त्री को बुलवाकर उनसे सलाह लेंगे कि  हमें क्या करना चाहिए। 
 
बाकी कल ,
 
लक्ष्मी।  :-))


Tuesday, 26 August 2014

To all! :-))

Sorry Dearies!

As I'm going through some rough health phase, I'm writing only answer specific blogs. Kindly bear with me.

Everyone's Friend,
Lakshmi.

 

Saturday, 16 August 2014

Lesson - 6

व्याकरण :

१.   विलोम  -

(क)  जीवन  -  मृत्यु
(ख)  प्रलय   -  सृष्टि
(ग)   काँटे    -   फूल
(घ)   कठिन -   सरल

२.   पर्यायवाची लिखिए -

(क)  फूल     -   सुमन, पुष्प
(ख)  नभ     -   आकाश , आसमान
(ग)  मानव  -    मनुष्य, मनुज
(घ)  कोयल -    पिक, कोकिल

३.  प्रत्यय लगाकर शब्द लिखिए -

(क)  ता    - सफलता , कटुता
(ख) मय   - मंगलमय , ममतामय
(ग)  इक   - सामूहिक , सामजिक
(घ)  वान  - बलवान , कांतिवान

४.   समास - विग्रह कीजिये :-

क.  सूखे - भूरे  = सूखे और भूरे
ख.  चाय - काफी =  चाय और काफी
ग.   पेन  - पेंसिल = पेन और पेंसिल
घ.  नदी - नालों  = नदी और नालों
ङ    शिव - पार्वती = शिव और पार्वती
च.  स्कूटर - कार  = स्कूटर और कार
छ.  छोटे - बड़े  = छोटे और बड़े
ज.  मुँह  - हाथ = मुँह  और हाथ

 पृष्ठ - ६४  (2 ) bit :

मूर्ति - सा   ,   छोटा - सा ,  बिजली - सा


      पृष्ठ  - ६५  (4 ) bit :

      मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य बनाइये :-

१.   नाक में दम  करना : - बहुत तंग करना (trouble a lot)
      सुरेश ने अपने शरारतों से सभी पड़ोसियों के नाक में दम कर दी।

२.   सिर  पर आना : -  ज़िम्मेदारी का एहसास होना 
      मेरी माँ के कोलकाता जाने से साड़ी ज़िम्मेदार दीदी के सर पर आई। 

३.   दाँतों  तले  उंगली  दबाना :- आश्चर्यचकित होना (astonished)
      रानी लक्ष्मीबाई की बहादुरी को देखकर अंग्रेज़ों ने दांतों तले उंगली दबा ली 

४.   आँखों का तारा होना - बहुत प्यारा होना  (apple of one's eye)
      मेरा छोटा भाई हम सबकी आँखों का तारा है। 

५.   अंधे की लाठी होना - एकमात्र सहारा होना (one and only means of support)
      पारुल के माता - पिता, उसकी दादी के लिए अंधे की लाठी के समान  हैं। 

६.   नौ दो ग्यारह होना - फरार होना , भाग जाना (to run away esp.after committing a mistake / crime)
      डाकू, पुलिस - बल को देखहर नौ-दो-ग्यारह हो गए। 

७.   हो - हल्ला करना - शोर मचाना  (raise a hue and cry)
      कक्षा से अध्यापिका के जाते ही, बच्चे हो-हल्ला करने लगते हैं। 

८.   ईद का चाँद होना - कभी - कभार दिखाई देना / बहुत दिनों बाद दिखाई  देना (become a rare visibility)
      जब से नौकरी लगी है, तुम तो ईद के चाँद हो गए हो। 

पद - परिचय 
 
क    मेरे मित्र का जन्म - स्थान अल्मोड़ा है। 
       सर्वनाम , एकवचन पुल्लिंग 
 
ख    ठंडी , चिकनी , चमकती बर्फ से भाप उड़ रही थी। 
       गुणवाचक विशेषण, स्त्रीलिंग, एकवचन। 
 
ग    धीरे - धीरे मेरी निगाह ने इस घाटी को पार किया। 
 
     
 
घ    शुक्ल जी, सेन और अन्य सभी ने देखा। 
       व्यक्तिवाचक संज्ञा , पुल्लिंग, एकवचन , कर्ता। 
 
ङ     सोमेश्वर की घाटी के उत्तर में ऊँची पर्वतमाला है। 
       सम्बन्धबोधक , अव्यय। 
 
पद परिचय में कुछ गलतियाँ  हो सकती हैं, जिसे में सही करने की कोशिश करुँगी।  काफी साल बीत  चुके हैं , हिंदी से मानो जैसे रिश्ते की डोर बहुत पतली हो चुकी हैं। 
 
सबकी दोस्त ,
 
लक्ष्मी  :-)))
 


Thursday, 14 August 2014

Paath - 6 & 7 Explanation !

पाठ - ६ 

अम्बर = sky,  धरती = earth, नभ = sky,  प्राण = life, कँपाना = to make one shiver, संगीत = music, ढहना = to rumble and fall, महल = palace, तात्पर्य = meaning, नीरव = silent, लिपि = language / font, प्रतीक = symbolism, प्रशंसा = appreciation, शीर्षक = title, सार्थकता = aptness / correctness, स्पष्ट = clear / clarify, गोद  = lap, वज्र = lightning, प्रहार = attack, प्रकृति = nature, शोभा = beauty, वनस्पतियों = vegetation, हरेपन = greenery, ऋतुओं  = seasons, आवागमन = arrival, शासनकाल = period of ruling, सीमाएँ  = borders, अजेय = impregnable, राज्य = domain / kingdom, तय = decide, नष्ट = destroy, पाया = obtained, शक्ति = power / energy, समझ = understand, सुंदरता = beauty, निरखने = to view, admire, महसूस = feel, आनंद = joy, संसार = world, वास्तविकता = reality, स्वर्गलोक = paradise / heaven, समृद्धि = prosperity, गुणगान = to sing praises, कल्पना = imagination, पंक्ति = line / queue, नकारना = deny, साधन = things / material, सूर्य = the SUN, प्रकाश = light, चन्द्रमा = moon, शीतलता = coolness, चमक = shine, बरसात = rain, कदम = footprint / step, जीवित = alive, प्राणी = organism, काँटे  = thorns, कठिनाई = difficulty, संघर्ष = struggle, सीखा = learnt, प्रेरणा = inspiration, प्राप्त = received, मार्ग = path, सुगमता = easiness, वस्तु  = thing, ज्ञान = knowledge, स्वर = sound, प्रेरक = inspirational, गीत = song, खेलना = play (verb), ऊंचा = high, वर्षा = rain, शिक्षा = lesson, बिजली = current / lightning, परिस्थितियाँ  = circumstances, अनुरूप = accordingly, ढलना = mould, पक्षी = bird, मुक्त = free, गगन = sky, सन्देश = message, आज़ादी = freedom, क्रियाशाली = active, व्यक्ति = person, ऊँचाइयाँ  = heights, छूना = touch, निर्भय = fearless, वातावरण = environment, गति = speed, प्रगति = progress, मनचाहा = favourite, अवसर = opportunity.
 
पाठ - ७ 

घाटी = valley, निकट = near, स्थान = place, विशेषता = speciality, उत्तर = north / answer, बसना = to stay / occupy, सुकुमार = adolescent / teenaged beauty, नदी = river, वन = jungle / forest, खेत = field (crop), बिखरना = disintegrate, खानसामा = housekeeper, खुशकिस्मत = lucky, पिछला = previous, शिखर = peak, आसार = sign, उज्जवल = as pure as snow, जलराशि = amount / level of water, दृश्य = sight, सुडौल = a beautiful shape, कल - कल = sound made by a smooth flowing river, मखमली = silky, रास्ता = way, पहाड़ी = mountains, डाकखाना = mountains, चाय = tea, दुकान  = shop, पुल  = bridge, चीड़ = pine tree, लोक = world, अड्डा = haunt / jaunt, पचास = fifty, शिला  = a small peak, कतार = queue, आपस = between, बेल = creeper, लड़ी = serial, रुपहले = pinkish, हल्का - नीला = light blue, मिश्रित = mixed, अटल = immovable / hard, विचार = thought, कौंधा = strike, हिम = snow, बर्फ = ice, केवल = only, पल = seconds / moments, लेकिन = but, प्रसन्न = happy, लेखक = writer, अन्य = other, मित्र = friend, वहाँ  = there, दृश्य = sight, अपार = limitless, ठेला = pushcart, केसर = saffron, सूरज = the SUN, किरण = ray, चित्र = picture, अंधेरा  = darkness, तारा = star, ठगना = to dupe, कलाई = wrist, लपेटना = to twirl / collect, आँख = eye, = गाँव  village, उतरना = get down / descend, चाहना = desire / want, उलझना = entangle, समान = likewise, भावविभोर = emotional.

आपकी दोस्त ,

लक्ष्मी.

Wednesday, 13 August 2014

Paath - 7

ठेले पर हिमालय 
 
मौखिक प्रश्न - उत्तर 
 
 
प्र   १  लेखक कौसानी क्यों गए थे?
 
उ    १  लेखक हिमालय की बर्फ की घाटी को निकट से देखने के लिए कौसानी गए थे। 
 
प्र    २  कौसानी कहाँ बसा हुआ है ?
 
उ    २  कौसानी सोमेश्वर की घाटी के उत्तर स्थिति में बसा हुआ है।  यहां प्रकृति का सुकुमार रूप, हर - भरे खेतों, नदियों तथा वनों के रूप में बिखरा पड़ा है। 
 
प्र   ३  खानसामे ने सबको खुशकिसम्मत क्यों कहा ?
 
उ   ३  खानसामे ने सबको खुशकिस्मत कहा क्योंकि पिछले दो हफ़्तों से हिम - शिखर दिखाई नहीं दे रहा था।  परन्तु लेखक के वहां पहुचने के दिन ही उसके दिखने के आसार हो रहे थे। 
 
 
प्र    ४ लेखक ने बैजनाथ पहुंचकर हिम्मलय से किस रुप में भेंट की ?
 

उ    ४  बैजनाथ पहुंचकर लेखक ने गोमती की उज्जवल जलराशि में हिमालय की बर्फीली चोटियों की छाया तैरती देखी। 
 
दीर्घउत्तरीय प्रश्न 
 
 
प्र   १   कोसी से कौसानी के बीच लेखक को किन दृश्यों ने आकर्षित किया ?
 
उ   १   कोसी से कौसानी के रास्ते में लेखक ने सुडौल  पत्थरों पर कल - कल करती हुई कोसी , किनारे के छोटे - छोटे सुन्दर गाँव तथा हरे - भरे मखमली खेत देखे. रस्ते में कहीं - कहीं पहाड़ी, डाकखाने, चाय की दुकानें, नदी - नालों पर बने पल तथा चीड़ के जंगल भी देखे . 
 
प्र   २   लेखक को ऐसा क्यों लगा कि  वे दूसरे ई लोक में चले आए हैं ?
 
उ   २   जब लेखक कौसानी क बस अड्डे पर उतरे , तो वहां का सौंदर्य देखकर आश्चर्यचकित रह गए।  पचासों मिल चौड़ी घाटी, हरे - भरे मखमली खेत , सुन्दर गेरू की शिलाओं को काटकर बनाए गए लाल रास्ते, उनके किनारे सफ़ेद - सफ़ेद पत्थरों की कतार तथा आपस में उलझी बेलों की लड़ियों के सामान नदियां देखकर लेखक इतना आनंदित वे किसी और ही लोक में  थे। 
 
प्र   ३  सबसे पहले बर्फ दिखाई देने का वर्णन लेखक ने कैसे किया है ?
 
उ   ३  लेखक ने धीरे - धीरे खिसकते हुए बादलों के बीच छोटे से बादल के टुकड़े जैसी, सफ़ेद, रुपहले तथा हलके नील रंग की मिश्रित अटल चीज़ देखी।  उनके मन में बिजली - सा यह विचार कौंधा कि  यहाँ  हिम - शिखर है।  बर्फ का यह रूप दृश्य केवल कुछ पल ही दिखाई दिया लेकिन लेखक प्रसन्नता से भर गया। 
 
प्र   ४  लेखक को ठेले पर हिमालय शीर्षक कैसे सुझा ?
 
उ   ४  लेखक शुक्ल जी, सेन तथा अपने अन्य मित्रों के साथ ब्बर्फ़ को निकट से दिखने के लिए कौसानी गए थे।  वहाँ  बर्फ के दृश्य ने लेखक को अपार हर्ष से भर दिया था।  इसलिए लेखक ने जब ठेले पर हिमालय देखा तो उसे ठेले पर हिमालय का शीर्षक मिला। 
 
प्र   ५   सूरज के डूबते ही सब गुमसुम क्यों हो गए ?
 
उ   ५   सूरज के डूबने पर धीरे - धीरे ग्लेशियरों में पिघला केसर बहने लगा।  घाटियां गहरी पीली हो गईं  . सूरज की किरणें  उस पर चमक रहीं थीं।  इसलिए उसका चित्र अच्छा था और अंधेरा  होने से तारे चमक रहे थे। पर सब ऐसे गुमसुम थे जैसे उन्हें कुछ मिल गया हो या जैसे अंदर ही अंदर उस चित्र की समेट  रहे थे। 

प्र    ६  लेखक ने यह क्यों कहा कि  -

      क  लगा जैसे ठगे गए हम लोग। 

      ख  कलाई में लपेट लूँ।  आँखों से लगा लूँ। 

उ   ६ क. कौसानी बस अड्डे पर उतरने पर जब लेखक को सबसे पहले छोटा - सा, उजड़ा हुआ - सा गाँव दिखाई दिया तथा बर्फ कहीं दिखाई न दी. तो लगा कि  वे ठगे गए हैं. वास्तव में उन लोगों ने जिस सुन्दर दृश्य की कल्पना की थी , वे चाहते थे की उन्हें कौसानी पहुँचते ही वही दृश्य देखने को मिले।

        ख. जब लेखक कौसानी के बस अड्डे पर उतरे तो वहां इधर - उधर से आकर आपस में उलझ जानेवाली बेलों की लड़ियों के सामान सुन्दर नदियों को देखकर इतना भावविभोर तथा हर्ष से भर उठे कि  उनके मन में आया कि  वह इन बेलों की लड़ियों को कलाई में बाँध ले और आँखों से लगा ले। 

जीवनमूल्यपरक प्रश्न - उत्तर 
 
 
प्र   .  १  यदि हिमालय न होता तो क्या - क्या न होता ?
 
उ      १  यदि हिमालय  न होता बहुत कुछ  न होता।  हिमालय से निकलने वाली नदियाँ न होती।  उत्तर दिशा में हमारे देश का कोई प्रहरी न होता।  हिमालय क्षेत्र में होनेवाले वनस्पतियाँ  न होती।  हमारे देश में पर्याप्त मात्रा में जल न होता।  हमारे देश का वायुमंडल इतना सुहाना न होता।  हमारा ऋतु - चक्र ऐसा न होता।  पर्वतारोहियों को विश्व की सबसे ऊँची चोटी पर पहुँचने  का गौरव हासिल करने का अवसर न मिला होता।  हमने  उन फलों का स्वाद लेना तो दूर, उनके नाम भी न सुने होते, जो केवल हिमालय क्षेत्र में मिलतें हैं।  हिममानव कहीं और विचरण करते। पाँचों पांडव किस रास्ते से स्वर्ग की ओर  जाते? भगवान शिव शंकर कहाँ  धूनी रमाते?
 
सबकी दोस्त ,
लक्ष्मी  :-))
 

Thursday, 7 August 2014

Paath - 6

अम्बर की बातें मैं जानूँ 
 
 
मौखिक प्रश्न उत्तर :
 
प्र  १   कवि अम्बर की बातें क्यों नहीं  जानता ?
 
उ १    कवि धरती पर रहता है, इसलिए अम्बर की बातें नहीं जानता। 
 
प्र  २   कवि के साथ सब कुछ धरती पर ही क्यों हुआ है ?
 
उ  २   कवि ने अपना जीवन धरती की गोद में बिताया है , इसलिए साथ सब कुछ धरती पर ही हुआ है। 
 
प्र   ३   नभ धरती के प्राण कैसे कंपाता है ?
 
उ  ३   नभ अपने वज्र प्रहारों से धरती का प्राण कँपाता  है। 
 
प्र  ४  प्राणों को नया संगीत कैसे मिला है ?
 
उ  ४  प्रकृति की शोभा से , वनस्पतियों के हरेपन से ऋतुओं के आवागमन से प्राणों को नया संगीत मिला है। 
 
अर्थ ग्रहण सम्बन्धी प्रश्न 
 
ढह  गए महल , गड गए मुकुट, धरती अब भी मुस्काती है, है चाँद सितारे मौन  खड़े, यह धरती अब भी गाती है. धरती पर कितने चरण चले, कितनों ने रोया - गया है, धरती की नीरव भाषा को, पर कौन ? मैंने धरती के गीत सुने, अम्बर की बातें मैं क्या जानूँ ?
 
प्र   १ 'ढह गए महल' से कवि का क्या तात्पर्य है ?
 
उ  १   सम्राटों ने अपने शासनकाल में जो अजेय दुर्ग बनवाए या राज्य की सीमाएं तय की , वे नष्ट हो गयीं। 
 
प्र  २  'धरती की नीरव भाषा' में छिपे अर्थ को स्पष्ट कीजिए ?
 
उ  २  धरती से बहुतों ने बहुत कुछ पाया , पर कोई भी इसकी शक्ति को समझ नहीं पाया। 
 
प्र   ३  कवि नभ की लिपि को क्यों नहीं जान पाया ?
 
उ  ३   कवि प्रकृति की सुंदरता को परखने, निहारने, महसूस करने और उसका आनंद उठाने में खोया रहा, इसलिए वह नभ की लिपि को नहीं जान पाया। 
 

दीर्घउत्तरीय प्रश्न
 
प्र  १  'अम्बर की बातें मई क्या जानूँ' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए ?
 
उ  १  हम जिस संसार में जी रहे हैं , वह एक वास्तविकता है जबकि जिस स्वर्गलोक के बारे में हमें बताया जाता है और उसकी जिस समृद्धि का गुणगान किया जाता है वह एक कल्पना है।  कवि इस पंक्ति द्वारा कल्पना को नकारने के लिए कह रहे हैं। 
 
 
प्र  २  धरती से हमें क्या - क्या मिलता है /
 
३   २  धरती से हमें जीवन जीने के सभी साधन मिलते हैं , तो आकाश से सूर्य का प्रकाश, चन्द्रमा की शीतलता , तारों की चमक , बरसात का पानी मिलता है। 
 
 
भाव स्पष्ट कीजिये :
 
क  धरती पर पहला स्वर फूटा 
 
उ  सबसे पहले धरती पर जीवन के कदम पड़े।  जीवित प्राणी पर ही पाये जाते हैं। 
 
ख  काँटों ने कठिन परीक्षा ले , जीवन का प्रेरक गीत दिया. 
 
उ   जीवन में जब - जब काँटों अर्थात कठिनाइयों का सामना हुआ, तब  - तब मैंने संघर्ष करना सीख और आगे बढ़ने की प्रेरणा प्राप्त की। 
 
ग  लपटों शोलों से खेला हूँ , शीतल बरसातें  मैं क्या जानूँ ?
 
उ   जीवन में संघर्ष करके आगे बढ़ने का मार्ग बनाया है, सुगमता से वस्तु कैसे प्राप्त की जा सकती है, इसका ज्ञान मुझे नहीं है। 
 
जीवनमूल्यपरक प्रश्न उत्तर 
 
 
प्र  .  आकाश हमें क्या सिखाता है ?
 

उ    आकाश हमें ऊँचे  उठने की सीख देता है।  वह सूर्य का प्रकाश, चन्द्रमा की शीतलता, वर्षा का पानी हम तक पहुंचाकर अपने पास जो है, उसे दूसरों को देने की शिक्षा देता है।  वह कभी बिजली की चमक देखकर हमें परिस्थितियों के अनुरूप ढलना सिखाता है तो कभी वह पक्षियों को मुक्त गगन में उड़ने देकर हमें यह सन्देश देता है कि  आज़ादी मनुष्य को क्रियाशील बनाती है।  आज़ाद व्यक्ति अधिक ऊँचाइयाँ  छूता  है।  निर्भय वातावरण किसी की भी गति और प्रगति को बढ़ाता है   उसे मनचाहा कर पाने का अवसर देता है। 

Friday, 1 August 2014

Hindi Grammar

पृष्ठ - ३० & ३१
१.

(i )    लम्बी समुद्री यात्रा
(ii )   निराकार भाप
(iii )  घने जंगलों
(iv )  ऊंची अटारी

२.

(क)   हम प्रदूषण फैला रहें हैं और धरती को विकृत कर रहें हैं।
(ख)  नदियों को साफ़ करके रेगिस्तानों में पानी ला रहें हैं।
(ग)  वह पानी के आधिपत्य वाले ग्रह  पर रहते हैं।
(घ)   स्वच्छ लग रही है वही  मादक लग रही है। 
(ङ )  मानसून घने जंगलों में जाता है और ठंडक पाकर ठहर जाता है। 

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पृष्ठ ४९ & ५०

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द -

क    जिसका आचरण भ्रष्ट हो         -   भ्रष्टाचारी
ख    जो किसी विषय का ज्ञाता हो    -   विशेषज्ञ
ग    लिपटे हुए कागज़ों का बंडल      -  पुलिंदा
घ    जो चारों तरफ फैला हुआ हो      -  सर्वव्यापी
ङ    जो दिखाई न दे                        -  स्थूल

पद - विग्रह

क   महाराज  -  महान है जो राजा       ङ   पीताम्बर         - पीला है जो अंबर
ख  महामंत्री  - महानं है जो मंत्री         च  प्रधानाध्यापक  - प्रधान है जो अध्यापक
ग  महापुरुष  - महान है जो पुरुष        छ  परमानंद          - परम है जो आंनद
घ  श्वेताम्बर - श्वेत है जो अम्बर       ज  नीलगगन        - नील है जो गगन

लोकोक्तियाँ

क  …………………………………………।   एक अनार सौ बीमार।
ख  …………………………………………। जाको राखे साईयाँ मार सके ना कोई।
ग  …………………………………………।  आम के आम, गुठलियों के दाम।
घ  …………………………………………। खोदा पहाड़ निकली चुहिया। 

Thursday, 24 July 2014

Hindi. Lesson -4 Sadachar ki taveez

मौखिक प्रश्न उत्तर :

१.        राजा ने दरबारियों से क्या पूछा ?

ans :    राजा ने दरबारियों से यह पूछा कि  कहीं उन्होंने भ्रष्टाचार को देखा है।

२.        राजा  दरबारियों को क्या काम सौंपा ?

ans:     जब कभी कहीं भ्रष्टाचार दिखाई दे तो उसका नमूना लाएं, ताकि पता चले वह  होता कैसा है। 

३.       भ्रष्टाचार ढूंढने का काम किसको सौंपा गया?

ans :  भ्रष्टाचार को खोजने का काम विशेषज्ञों को सौंपा गया। 
 
४.       महाराज का स्वास्थ्य क्यों बिगड़ता जा रहा है ?
 
ans :   विशेषज्ञों की रिपोर्ट का पुलिंदा देखकर महाराज का स्वस्थ्य बिगड़ता जा रहा है। 
 
५.       तावीज़ बंधा होने पर भी इकतीस तारीख को कर्मचारी ने घुस लेना स्वीकार क्यों नहीं किया ?
 
ans :   उसे जो वेतन मिला होगा , वह वेतन की अगली तारीख आने से पहले ही समाप्त हो गया होगा। 
 
*        दीर्घउत्तरीय प्रश्न उत्तर :
 
१.       विशेषज्ञों ने भ्रष्टाचार मिटने का क्या - क्या उपाय बताया ?
 
ans :  विशेषज्ञों ने सुझाया कि  भ्रष्टाचार मिटने के लिए महाराज को व्यवस्था में बहुत सरे परिवर्तन करने होंगे।  एक तो भ्रष्टाचार के मौके मिटने होंगे, जैसे ठेका है तो ठेकेदार है और ठेकेदार है तो अधिकारीयों की घूस  है।  ठेका मिट जाये तो उसकी घूस  मिट जाये।  इस तरह और बहुत - सी चीज़ें हैं, जिन कारणों से आदमी घूस  लेता है। 
 
२.      साधु ने सदाचार और भ्रष्टाचार के बारे में क्या बताया ?
 
ans :  साधु ने कहा कि  भ्रष्टाचार और सदाचार मनुष्य की आत्मा में होता है, बाहर से नहीं होता।  विधाता जब मनुष्य को बनता है , तब किसी की आत्मा में आत्मा में ईमान या बेईमानी के स्वर निकलते हैं , जिन्हे 'आत्मा की पुकार' कहते हैं।  आत्मा के पुकार के अनुसार ही आदमी काम करता है। 
 
३.      महाराज को झंझट का क्या समाधान सुझाया गया ?
 
ans :  महाराज को यह सुझाव दिया गया कि  प्रत्येक आदमी की भुजा पर सदाचार की तावीज़ बाँध दिया जाए तो उसे ईमानदारी के रस्ते पर चलने को बाध्य करता रहे। 
 
४.     राजा ने तावीज़ की सत्यता / वैधता की जांच कैसे की ? उसके क्या परिणाम निकले ?
 
ans : राजा ने वेश बदलकर अपने कर्मचारियों को घूस  देने की कोशिश की।  पहली बार वह घूस  देने में असफल रहा, क्यूंकि कर्मचारी ने घूस  स्वीकार नहीं की।  इससे राजा खुश हुआ।  मगर दूसरी बार वाही कर्मचारी घूस  को राज़ी हो गया क्यूंकि वह महीने का आखिरी दिन था।  कर्मचारी के भ्रष्टाचारी आचरण से हैरान राजा ने जब उसकी बाजु पर बंधे तावीज़ के साथ कान लगाकर सुना, तो उसमे से आवाज़ आ रही थी, 'ले - ले , ले - ले ' , आज तो इकतीस तारीख है।  यानि सदाचार के तावेज़ बाँधने   भ्रष्टाचार नहीं निकला। 
 
५.    आशय स्पष्ट कीजिये :
 
क.  'वह स्थूल नहीं सूक्ष्म है, पर वह सर्वव्यापी है।  उसे देखा नहीं अनुभव किया जा सकता है ' . 
ख.  तावीज़ में से स्वर निकल रहे थे - 'अरे आज इकतीस तारीख है, आज तो ले ले ' . 
 
ans  : क.  भ्रष्टाचार व्यवहार है, कोई वास्तु नहीं, जो दिखाई दे।  वह तो घूस  के रूप में दी जा रही वास्तु या पदार्थ के रूप में होता है।  उसे देखकर भी यह जाना जा सकता है कि  भ्रष्टाचार हो रहा है। 
 
         ख.  कर्मचारियों को जो मासिक वेतन मिलता रहा होगा, उससे पूरे  महीने वह अपने परिवार का भरण - पोषण नहीं कर पते होंगे , इसलिए इकतीस तारीख को उनके मन में यह भाव अत होगा कि  आज तो घूस  लेने पर ही गुज़र संभव है, सो आज घूस  ले ली जाये, कल जब वेतन मिल जायेगा तब फिर घूस  लेना बंद।  कर्मचारियों को पर्याप्त वेतन दिए बिना भ्रष्टाचार नहीं मिटाया जा सकता। 
 
६.    पाठ में छिपे व्यंग्य को स्पष्ट कीजिये। 
 
ans  :  पाठ में व्यंग्य दिया गया है कि  भाषणों, नैतिक मूल्यों, स्लोगनों या डंडे के ज़ोर पर भ्रष्टाचार को नहीं मिटाया जा सकता।  यदि राज्य, कर्मचारियों को उनकी आवश्यकतायें पूरी करने के लिए पर्याप्त वेतन दे और नैतिक मूल्यों की स्थापना हो जाये तो भ्रष्टाचार समाप्त हो जायेगा। 
 
जीवनमूल्यपरक प्रश्न उत्तर  :
 
१.    कभी - कभी सदाचार भ्रष्टाचार में क्यों बदल जाती है ? परिस्थितियाँ  ऐसी होती हैं या विवशता ?
 
ans :  क. सदाचार को भ्रष्टाचार में बदलने का काम कभी परिस्थितियां करती है तो कभी विवशता।  कभी यह बहाना भी होता है और सोचने का दृष्टिकोण। 
         ख. सबके साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार करना , किसी को दण्डित न करना , कोई बात या काम प्यार से समझाना , ये सब सदाचार के लक्षण हैं। 
         ग. कई कर्मचारी शुरू - शुरू में रिश्वतखोरी नहीं करते , पर दूसरों के दबाव में करने लगते हैं।  इन्हे परिस्थितियों या विवशता के कारण भ्रष्टाचारी बनना कहा जा सकता है। 
         घ. कोई यह सोचकर भ्रष्टाचारी हो जाते हैं कि  जब सब भ्रष्टाचारी हैं तो अकेले मेरे सदाचारी बने रहने से क्या अंतर पड़ने वाला है। 
 
अर्थग्रहण सम्बन्धी प्रश्न उत्तर :
 
"मुझे नहीं मालूम था कि  मेरे राज्य में ऐसे चमत्कारी साधु भी हैं।  मगर हमें लाखों नहीं करोड़ों तावीज़ चाहिए।  हम राज्य की ओर  से तावीज़ों  का एक कारखाना खोल देते हैं।  आप उसके जनरल मेनेजर बन जाएँ और अपनी देख - रेख में बढ़िया तावीज़ बनवाइए।  "
 
१.   राजा क्यों खुश थे ?
 
ans :  राजा खुश हो रहा था  क्यूंकि उसे पहली बार पता लगा था कि  उसके राज्य में ऐसे चमत्कारी साधु हैं। 
 
२.    करोड़ों तावीज़ की आवश्यकता क्यों थी ?
 
ans :  राज्य के हर नागरिक के हाथ पर बंधने के लिए करोड़ों तावीज़ की आवश्यकता थी। 
 
३.   किसको जनरल मेनेजर बनाने के लिए कहा जा रहा था और क्यों ?
 
ans : साधु को जनरल मेनेजर बनाने के लिए कहा जा रहा था ताकि वह अपने देख-रेख में तावीज़ का निर्माण कर सके। 
 
Hurray ! Its OVER.

Wednesday, 23 July 2014

Hindi Lesson-3

जल यात्रा

पृ १.       अपने इस पृथ्वी गृह के मूल स्वरूप का अननुमान कब और कैसे लग सकता है?

उत्तर    : पृथ्वी गृह के मूल स्वरूप का अनुमान लम्बी समुद्री यात्रा पर जाकर ही हो सकता है।  तभी मनुष्य को यह पता चलेगा कि  इस धरती पर पानी अधिक आधिपत्य है। 

पृ  २।     सजीव कलाकृतियां  किसे कहा गया है और क्यों ?

उत्तर   :  बादलों को सजीव कलाकृतियां  कहा गया है क्योंकि ये धरती को हरा - भरा और शीतल करके जीवन प्रदान करती है। 

पृ ३।      नदियों में बाँध क्यों बनाने पड़े ?

उत्तर : नदियों पर बाँध इसलिए बनाने पड़े क्योंकि जनसँख्या वृद्धि के कारण हमारी आवश्यकताएं बढ़ गयीं हैं।  हमें अधिक अन्न और बिजली चाहिए।  ऐसे में बांधों में , सिंचाई के लिए और बिजली उत्पादन के लिए जल का संचय आवश्यक हो गया। 

पृ ४।     नदी पानी का कौन सा रूप है ?

उत्तर   : नदी पानी का चंचल रूप है। 

पृ ५  .   नदी में घुले रसायन कौन - कौन से रोग फैलाते हैं ?

उत्तर   : नदी में घुले रसायन कॉलरा , टायफॉइड  और दस्त जैसे रोग फैलाते हैं। 

दीर्घउत्तरीय पृश्न 

१.            समुद्र अपने खारेपन को कैसे दूर करता है ?

उत्तर     : समुद्र का खारापन प्राकृतिक रूप से दूर होता है / जब सूरज की गर्मी से समुद्र का पानी गरम होता है तो उससे भाप बनती है।  यह पानी जब भाप का रूप धारण करती है तो खारापन दूर हो जाता है।  इसी भाप से बादल बनता है और फिर वर्षा होती है। (Nothing but water - cycle in Hindi)

२.  बादलों का निर्माण कैसे होता है ?

उत्तर    :   सूर्य की गर्मी से तपकर समुद्र का पानी भाप बनता है।  निराकार भाप ऊपर जाकर साकार बादल में ढल जाती है।  इन बादलों को मानसून की हवाएँ सैकड़ों या हज़ारों किलोमीटर दूर की जगहों तक ले जाती हैं। 

३.  पाठ में नदी के क्या - क्या लाभ बताये गए हैं ?

उत्तर  : पाठ में नदी के निम्नलिखित लाभ बताये गए हैं :

(i )   संस्कृतों का उद्गम नदियों की ही दें है।
(ii )  नदियों से ही जीवनयापन संभव हुआ है। 
(iii ) नदियों से कृषि करना संभव हुआ है। 
(iv )  नदी जल - जीव - जंतुओं की रक्षा करने वाली भी है। 

४.  नदियों के विषाक्त होने के क्या - क्या कारण हैं ?

उत्तर : कल - कारखानों द्वारा ज़हरीले रासायनिक पदार्थ पानी में बहा देने से नदियां ज़हरीली हो रही हैं।  इसके अलावा  किसानों द्वारा अपने खेतों में कीटनाशकों का छिड़काव करने से नदियाँ  दोषित हो रही हैं। 

५.  'पानी का चंचल रूप है नदी' - कहने के पीछे लेखक का क्या भाव रहा होगा?

उत्तर : लेखक द्वारा नदी को पानी का चंचल रूप कहने के पीछे यही भाव रहा होगा कि वे सदा अनियंत्रित होने से कभी - कभी बाढ़ जैसी स्तिथि भी आ जाती है। 

६.  ऐसा क्यों कहा गया है ?
(i )  आखिर हम इस धरती पर मेहमान हैं।
(ii ) पानी जहाँ से आया था फिर से वापस नहीं जाता। 

उत्तर : (i ) जिस तरह मेहमान कुछ समय टिककर विदा हो जाते हैं, उसी तरह मनुष्य धरती पर कुछ वर्ष जीवित रहकर अंत में मृत्यु को प्राप्त हो जाता है।  इसलिए हम धरती पर मेहमान के समान हैं। 

(ii ) समुद्र का पानी सूर्य की गर्मी से बादल बनकर , बादल रूप से वर्षा बनकर , फिर वर्षा से नदी  बहता है।  अंत में समुद्र में ढल जाता है और वापस नहीं पहुँचता। 

७.  संस्कृतियाँ  नदी के किनारे ही क्यों जन्म लेती हैं ?

उत्तर : मनुष्य जीवन की प्रथम आवश्यकता पानी है।  मनुष्य को पानी की ज़रुरत पिने या दैनिक कार्यों की पूर्ती के लिए होती है।  इसके अतिरिक्त नदियों की पानी से सिंचाई करके, कृषि के क्षेत्र में भी सफ़लता मिलती है।  इसी कारण संस्कृतियों का जन्म नदी पर ही होता रहा। 

८.  पानी के विभिन्न रूप में क्या - क्या रासायनिक परिवर्तन होते हैं? लिखिए। 

उत्तर : कल - कारखानों के खतरनाक रासायनिक पदार्थ और शहरों का मल आदि नदियों में बहा देने से वे विषाक्त हो रही हैं।  दूसरी ओऱ  किसान खेतों में जिन कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं, वह देर -सवेरे नदियों में पहुँचता है।  इससे नदियां विषाक्त हो रही हैं।  इनमे से बहुत ज़हरीले रासायनिक पदार्थ बरसों बाद भी प्रभावहीन नहीं होते। 

जीवनमूल्यपरक प्रश्न उत्तर :

पानी न होता तो कुछ न होता - क्या आपके विचार में यह कथन सार्थक है ? सिद्ध कीजिये।

उत्तर :  (i ) पानी न होता तो - मेरे विचार में यह कथन सार्थक है , क्योंकि जल ही जीवन है। 

(ii )  यह सच भी है।  मनुष्य पशु - पक्षी, वनस्पति एवं जलचर जल पर आश्रित हैं।  सबको जीवन जल ही देता है

(iii )  पानी के इस महत्व का पता हमें उन कहावतों से भी चलता है, जो उस जल से सम्बन्ध तो नहीं रखती जिसका हम सेवन करते हैं , पर उसका होना आवश्यक है।  इस ओऱ  आवश्यक संकेत करती है। 

(iv ) रहीम जी ने भी अपनने दोहे में कहा है :

रहिमन पानी रखिये, बिन पानी सब सून।
पानी  गए न उतरे, मोती, मानस  चून  .



That's it today, dearies, am exhausted . lsn - 4 tomorrow.

Saturday, 19 July 2014

Lsn - 5 in Hindi

दरबारी - courtier, भ्रष्टाचार - corruption, विशेषज्ञ - specialist / expert, स्वास्थ्य - health, पुलिंदा - bundle, वेतन - salary, कर्मचारी - employee, समाप्त - end / finish, व्यवस्था - system, ठेका - contract, ठेकेदार - contractor , अधिकारी - officer, घूस - bribe, सदाचार - righteousness, ईमान - honesty / truthfulness, बेईमानी - dishonesty, झंजट - unwanted trouble, पुकार - call, भुजा - arm, तावीज़ - totem, बाध्य - push forward (lit.), वैधता - credibility, जांच - examine, परिणाम - result, कोशिश - try, असफल - unsuccessful, स्वीकार - accept, राज़ी - ready, आचरण / व्यवहार  - behaviour, इकतीस - 31st, स्थूल - physical , सूक्ष्म - invisible, स्वर - वौइस्, वस्तु - thing, पदार्थ - material, भरण - पोषण - caretake / look after, तारीख - date, गुज़र - to carry on, संभव - possible, पर्याप्त - enough.

भ्रष्टाचारी - a corrupt person, सर्वव्यापी - omnipresent, अदृश्य - invisible, व्यंग्य - satire, आवश्यकताएं - needs, परिस्थिति - circumstance, विवश्ता - powerless / compelled, बहाना - excuse, प्रेम पूर्ण - full of love, दण्डित - to be punished, लक्षण - characteristics, रिश्वत - bribe, चमत्कारी - miraculous, साधू - saint / godman, नागरिक - citizen, निर्माण - produce.

Friday, 18 July 2014

Word Meanings

जल - वाटर।  यात्रा - जर्नी , समुद्री यात्रा - वॉयेज , पृथ्वी - एअर्थ , मूल स्वरूप - बेसिक फॉर्म

ग्रह - प्लेनेट , अनुमान - एस्टीमेशन, अधिपत्य - डोमिनेशन।

सजीव - लाइवली , कलाकृतियाँ - क्राफ़्ट , हरा - भरा - ग्रीन, शीतल - कूल, प्रदान - प्रोवाइड।

बाँध - डैम, जनसँख्या - पापुलेशन, वृद्धि - इनक्रीस , आवश्यकताएं - नीड्स, सिंचाई - इरीगेशन,

उत्पादन - प्रोडक्शन।

चंचल - प्लेफुल

घुला - डिसॉल्वड , रसायन - केमिकल , रोग - डिजीज।

खारापन - साल्टिनेस्स , प्राकृतिक - नेचुरल, भाप - स्टीम, निर्माण - क्रिएशन , निराकार -

शैपलेस्स , साकार - शैप्ली , ढल - मोल्ड। 

संस्कृति - सिविलाइज़ेशन , उद्गम - ओरिजिन , जीवनयापन - एअर्निन्ग अ लाइवलीहुड ,

संभव - पॉसिबल , जल- जीव - जंतु - एक्वेटिक ओर्गनिसम्स , विषाक्त - पोइसोनॉस ,
कल - कारखाना - इंडस्ट्रीज , रासायनिक पदार्थ - केमिकल कंपाउंड्स , कीटनाशक - पेस्टिसाइड , छिड़काव - स्प्रिंकल , दूषित - डर्टी।

अनियंत्रित - उनकंट्रोलड , बाढ़ - फ्लड , टिकना - स्टे , दैनिक - डेली, अतिरिक्त - एक्स्ट्रा , क्षेत्र - फील्ड , परिवर्तन - चेंज , प्रभावहीन - एफ्फेक्टलेस्स , सार्थक - useful ,
 

Wednesday, 16 July 2014

The basics in hindi

का के की।    बहुत गड़बड़ है बच्चों। 

राम पुल्लिंग है।  इसलिए उसके साथ जुडी हर चीज़ पर का नहीं लगेगी. वह इस बात पर निर्भर है कि आगे कौनसा शब्द आनेवाला है।  जैसे

राम का जूता।
जूता पुल्लिंग है इसलिए उससे पहले का आएगा।

राम की मामी , थैली, गाडी आदि।
मामी, थैली, गाडी आदि  स्त्रीलिंग है इसलिए की आएगी।

राम के मौजे, दादाजी, पापा, मित्र।
अब ये थोड़ा मुश्किल है पर धीरे धीरे समझ आ जायेगा ।
मौज़े बहुवचन है, जब कोई चीज़ बहुवचन हो तो उससे पहले के आएगा और जिनका हम आदर करते हैं उनके नाम या सर्वनाम से पहले के का उपयोग होगा।

विलोम शब्द और पर्याय वाची शब्द या तो रट्टा लगा लो या फिर समझो, जैसे
फूल का पर्याय है सुमन, पुष्प, कुसुम इत्यादि।  अब आप जब भी किसी फूल को देखो तो औने दिमाग में फूल के बदले उसका पर्याय याद करो. वैसे भी हम भारतीयों के भाषाओं में संस्कृत की बहुत देन है , इसलिए कुछ पर्याय आपके भाषा से जुड़े होंगे। 

विलोम आसान है, उसके साथ प्रत्यय या उपसर्ग जोड़ने से बात बन जायेगी। 

अब प्रश्न एवं उत्तर आप रट्टा लगा सकते हैं या उसे पहले अपनी भाषा में समझकर फिर अपने शब्दों में लिखने का प्रयत्न कर सकते हैं।

आप सबकी दोस्त ,
:-)