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Tuesday, 3 March 2015

Lesson - 9 Beej Paudhe kaa Janm

Lesson 9 in Hindi by the name बीज पौधे का जन्म is somewhere under the label term 2.

Sorry for the confusion!

Everyone's friend,
Lakshmi :-)

Monday, 2 March 2015

Lesson - 19 Ann Frank Ki Diary - COntd.

४ .  ऐन  फ्रैंक के छिपने की जगह का वर्णन कीजिए 

उ।  इमारत के तल  मंज़िल पर बना बड़ा - सा गोदाम काम करने की जगह और भण्डार घर के रूप में इस्तेमाल होता था।  सीढ़ियों के ऊपर बनी  जगह से दाईं तरफ का दरवाज़ा घर के पिछवाड़े उनके गुप्त एनेक्सी की तरफ जाता था।  कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि  इस सपाट मटमैले दरवाज़े के पीछे इतने कमरे भी हो सकते हैं।  सीढ़ियों की दाईं तरफ गुसलखाना और बिना खिड़कियोंवाले एक कमरा था , जिसमे एक वाशबेसिन लगा था।  दरवाज़े से ऐन  और मार्गोट के कमरे की तरफ जाया जा सकता है। 

५. ऐन  फ्रैंक और उसका परिवार कैसे पकड़ा गया था ? उनका अंत कैसे हुआ ?

उ।  ६ जनवरी १९४५ को आस्चविट्ज़ में भूख और यंत्रणा से ऐन  के माँ एडिथ फ्रैंक की मृत्यु हो गई।  मार्गोट और ऐन  फ्रैंक को अक्टूबर में बर्गेन बेलसेन के यातना शिविर में लाया जाया गया।  यहां गंदगी के कारण टॉयफस नाम की महामारी फैली हुई थी।  मार्गोट और ऐन इसका शिकार हो गईं।  १२ अप्रैल, १९४५ को ब्रिटिश सेना द्वारा यातना शिविर को मुक्त कराने पर युद्ध समाप्त हुआ, किन्तु तब तक केवल ऐन  फ्रैंक के पिता ओट्टो  फ्रैंक ही जीवित  बचे थे। 

जीवनमूलयपरक प्रश्न उत्तर 

प्र   युद्ध से जन - जीवन कैसे प्रभावित होता है ?

उ।  युद्ध के समय जन - जीवन ठप हो जाता है।  असुरक्षा की भावना पीछा नहीं छोड़ती। 
     जो काम सरल होता है , वह काम कठिन हो जाता है। 
     कल - कारखाने बंद हो जाते हैं। 
     स्कूलों की छुट्टी हो जाती है।  ऑफिस बंद हो जाता है। 
     युद्ध के कारण की लोग मर जाते हैं। 

समाप्त। ……………………………………… 

सबकी सखी ,

लक्ष्मी :-)))

सरसुती के भण्डार की बड़ी अपूरब बात,
ज्यों खर्चे त्यों त्यों बढे, बिन खर्चे मिट जाय 


 

Sunday, 1 March 2015

Lesson - 19 Ann Frank Ki Diary!

ऐन  फ्रैंक की डायरी 

मौखिक प्रश्न उत्तर
१   ऐन  फ्रैंक ने किस उम्र में डायरी लिखना सुरु किया था ?

उ  ऐन  फ्रैंक ने तेरह  साल की उम्र में डायरी लिखना शुरू किया था। 

२  डायरी लिखने के पीछे ऐन  फ्रैंकके क्या विचार थे?

उ  डायरी लिखने के पीछे ऐन  फ्रैंक का उद्देश्य अथवा विचार यह था कि  वह गुप्त आवास के दौरान अपनी दिनचर्या को लिपिबद्ध कर सके। 

३  ऐन  फ्रैंक और उसके परिवार को क्यों छिपकर रहना पड़ा ?

उ  दूसरे महायुद्ध के दौरान हॉलैंड के यहूदी परिवारों को अकाल्पनिक यंत्रणाओं से गुज़रना था तथा ऐन  फ्रैंक  और  उसके परिवार को यहूदी  गुप्त आवास में रहना पड़ा। 

४   हिटलर को मारने का षड्यंत्र  किसने किया था ?

उ   हिटलर को मारने का षड्यंत्र एक जर्मन जनरल  ने किया था.

६  तल मंज़िल का इस्तेमाल किस रूप में होता था ?

उ  तल मंज़िल का इस्तेमाल काम करने की जगह और भण्डार घर के रूप में होता था। 

दीर्घउत्तरीय प्रश्न उत्तर 

१ वे सेल्फमेड आदमी थे - किसके बारे में कहा जा रहा और क्यों ?

उ  यह कथन ऐन  फ्रैंक के दादा माइकेल फ्रैंक के बारे में कहा जा रहा है। उनके बारे में ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि उनका एक बैंक था.  मेहनत  करके वे लखपति बन गए थे।  वे शुरू से ही अमीर  नहीं थे।  उन्होने अपने बलबूते पर पैसे कमाया था। 

२  पिता को फ्राइंग पैन में से बचा - कूचा खाना निकालते समय अपने - आप  पर हंसी  क्यों आ गई ?

 उ ऐन  फ्रैंक के पिता ओट्टो  फ्रैंक ने अमीरी में ही जीवन बिताया था।  हालांकि ऐन  के दादा के मरने के बाद दौलत इधर - उधर हो गई थी किन्तु कुछ अमीर  रिश्तेदारों की वजह से ऐन  के पिता की आर्थिक स्तिथि अच्छी - खासी रही।  अब गुप्त आव्वस के दिनों उन्हें मजबूरन अभावों में जीना पद रहा था।  तभी फ्राइंग पैन से बचा  - कुचा  खाना निकालते समय इन के पिता को भाग्य के खेल पर हँसी  आ गई। 

३.  सचमुच एक शानदार खबर - किस    खबर को शानदार कहा जा रहा है और क्यों ?

  शानदार खबर यह है कि  छिपने की जगह एक इमारत थी। तल  मंज़िल पर बना -  गोदाम काम करने की जगह और भण्डार घर के रूप में  इस्तेमाल होता है।  सीढ़ियों के ऊपर बानी जगह दाईं तरफ  दरवाज़ा घर के पिछवाड़े उनके गुप्त   एनेक्सी  की तरफ जाता था। 

४  ऐन  फ्रैंक की छिपने की जगह का वर्णन कीजिए।

इमारत के तल  मंज़िल पर बना बड़ा सा गोदाम काम करने की जगह और  


 

Lesson - 16 Kundaliyaan

कुंडलियाँ 

मौखिक प्रश्न उत्तर 

१.  सहस नर किसके गाहक होते हैं और क्यों ?

उ   सहस नर गन के गाहक होते हैं क्योंकि बिना गुणवाले व्यक्ति को कोई नहीं पूछता। 

२   जग में हँसाई  क्यों होती है ?

ऊ  बिना सोचे - विचारे  किया गया कार्य अक्सर बिगड़ जाता है तथा जग में हँसाई  होती है। 

३  दौलत पाते ही लोग घमंडी क्यों हो जाते हैं?

उ  जब लोगों के पास दौलत आ जाती है तो वे स्वयं को श्रेष्ठ समझते हैं।  वे सोचते हैं कि  दौलत उनके पास सदा रहेगी। 

दीर्घउत्तरीय प्रश्न उत्तर

१.  पहले पद में कवि ने क्या सन्देश देना चाहा है ?

ऊ  पहले पद में कवि ने यह सन्देश दिया है कि  मनुष्य को दौलत पाकर अभिमान नहीं करना चाहिए।  धन जल के सामान चंचल होता है , यह कहीं टिक कर नहीं रहता।  इसलिए मानव को मीठी वाणी बोलकर, विनम्रता के साथ रहना चाहिए तथा जग में यश प्राप्त करना चाहिए।  दौलत सबके पास मेहमान की तरह केवल चार दिन ही रहती है। 

२  कवि धन से भी ज़्यादा किसको महत्वपूर्ण मानते हैं और क्यों ?

उ  कवि मीठी वाणी बोलनेवाले तथा सबके प्रति विनय का व्यवहार करनेवाले व्यक्ति की तरह बनने को कहते हैं क्योंकि इसी से व्यक्ति को संसार में यश तथा कीर्ति मिलती है जो मनुष्य के साथ सदा रहती है। इसीलिए वे धन से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण यश को मानते हैं। 

३।   ऐसा क्यों कहा गया है कि  :

क।     चंचल दिन चारिको , ठाउ  न रहत निदान ?

उ  जिस प्रकार जल चंचल होता है , उसे बांधकर नहीं रखा जा सकता है , उसी प्रकार लक्ष्मी भी चंचल होती है, वह एक स्थान पर  टिकती। 

ख    दोउ को िकरंग , काग भये सब अपावन। 

उ  कोयल तथा कौआ दोनों का रंग एक ही होता है , किन्तु कोयल का कूकना मनोहारी लगता है तथा के का काँव  - काँव  करना अपवित्र तथा अशुभ माना जाता है। 

ग  .  खान - पान - सनमान , राग - रंग मनहिं  न भावै। 

उ  जब व्यक्ति बिना सोचे - विचारे  कार्य करता है तो अकसर उसका काम बिगड़ जाता है, जिस कारण निराशा में उसे न तो खाना - पीना अच्छा लगता है और न ही राग-रंग में उसका मन रमता है।  उसके मन में अशांति रहती है। 

४  आपके अनुसार किसी भी काम को करने से पहले क्या विचार करना चाहिए ?

उ  किसी भी काम को करने से पहले अच्छी तरह से सोच विचार करके यह निश्चित कर लेना चाहिए कि  कार्य हितकारी है या नहीं।  जल्दबाज़ी में अकसर  कार्य बिगड़ जाता है और आगे चलकर मान - सम्मान की हानि हो सकती है।  अत: अपनी इज़्ज़त का और दूसरों के हित  का ध्यान रखते हुए काम करना चाहिए। 

जीवनमूलयपरक प्रश्न उत्तर 

जीवन में धन का स्थान है पर आजकल धन ही जीवन बनता जा रहा है।  आप पैसे को कितना महत्त्व देते हैं ? धन से क्या खरीदा नहीं जा सकता। 

उ  धन महत्वहीन है , यह तो घर गृहस्थी से बँधा कोई भी व्यक्ति नहीं कह सकता।  पर, कहा गया है - किसी भी चीज़ की अति बुरी होती है।  भरी ठण्ड में भी आवश्यकता से अधिक कपडे शरीर को ठण्ड से बचाने की जगह अत्यधिक गर्मी देता है। 

ख  अधिक खाना उठना - बैठना दूभर कर देता है।  अधिक पढ़ाई करने से याद किया भी भूलने लगते हैं। 

ग  अपनी और अपनों की सुद्ध - बुध खोकर अच्छे - बुरे, नैतिक - अनैतिक का विचार न करके कमाई कर भी ली तो अनैतिक उपाय ने इतना बदनाम कर दिया होगा कि  कोई सम्बन्ध नहीं रखना चाहेगा। 

घ  हाँ , इस बीच धन ज़रूर जमा हो , साथ ही यह भय भी कि  कहीं जालसाज़ी में पकडे न जाएं , कहीं जेल की हवा न खाना पड़  जाए। 

ङ   सबसे बड़ी बात, धन से न तो शान्ति खरीदी जा सकती है , न चैन, न मित्र, न अपने। 

समाप्त। …………… 

लक्ष्मी ! :-)))

Lesson - 18 Thank You! Nikumbh Sir!

थैंक यू , निकुम्भ सर! 

मौखिक प्रश्न उत्तर

१  ईशान को क्या - -क्या करने में मज़ा आता था ?

उ  ईशान को रंगों , मछलियों, पतंगों और अपने पालतू कुत्ते की सांगत में आनंद  आता था। 

२  ईशान को क्लास में पढ़ा हुआ क्यों समझ में नहीं आता है ?

उ  ईशान डिस्लेक्सिया का ग्रस्त था इसलिए उसे क्लास में पढ़ा हुआ समझ नहीं आता। 

३  ईशान के लिए रिपोर्ट कार्ड का क्या महत्त्व है ?

उ  ईशान के लिए रिपोर्ट कार्ड केवल कागज़ का टुकड़ा - भर था। 

४  एब्सेंट नोट क्यों तैयार करना पड़ा ?

उ  ईशान को पहले पीरियड में आधे क्लास से बाहर कर दिया गया और दूसरे पीरियड में मैथ्स का होमवर्क न करने के कारण उसने क्लास बँक  कर दी इसलिए ईशान को एब्सेंट नोट तैयार करवाना पड़ा। 

५  स्कूल ने ईशान की पेंटिंग को कैसे सम्मानित किया ?

उ  स्कूल ने ईशान की पेंटिंग को एनुअल रिपोर्ट के आवरण पर छापकर सम्मानित किया। 

दीर्घउत्तरीय प्रश्न उत्तर

१  ईशान को बोर्डिंग स्कूल भेजने के पीछे क्या कारण था ?

ऊ  ईशान को कक्षा में पढ़ाया हुआ समझ में नहीं आता , वह अपनी कल्पनाओं में खोया रहता था।  उसे होमवर्क से भी चिढ थी।  उसके इसी आचरण के कारण अध्यापक भी उससे नाराज़ रहते थे।  इन्हीं कारणों से उसे बोर्डिंग स्कूल भेजना पड़ा। 

2  ईशान का मन बोर्डिंग स्कूल में क्यों नहीं लगा ?

ऊ  बोर्डिंग स्कूल के टीचर डांटते तो काम थे किन्तु अपमान ज़्यादा करते थे।  पुराने ड्राइंग टीचर तो मारपीट भी करते थे। परिवार से दूरी और अध्यापकों द्वारा हर बात पर अपमान ईशान से सहन न हो सका और वह एकदम टूट गया। 

3.  निकुम्भ सर ने कक्षा में आते ही क्या - क्या कहा ?

उ   नए ड्राइंग टीचर राम शंकर निकुम्भ कक्षा में तूफ़ान की तरह आए।  उनके आते ही ऐसा लगा मानो उन्होंने नियम, कायदे, कानून और अनुशासन को तोड़ने का सन्देश दिया हो।  उन्होंने कहा कि  जो तुम्हारे मन में है उसे कागज़ पर उतारो। 

४.  निकुम्भ सर को ईशान का प्रतिभा का कैसा पता चला ?

उ  निकुम्भ सर के कहने पर सभी बच्चे ड्राइंग बनाए किन्तु ईशान चुपचाप बैठा रहा।  तब उसके बारे में अधिक से अधिक जानने के लिए निकुम्भ सर मुंबई उसके घर गए।  वहाँ  ईशान की चीज़ें  देखकर उनको यह एहसास हो गया कि  ईशान के भीतर रंगों का एक जादूगर छुपा बैठा है।  जैसी कल्पना ईशान में है वह साधारण बच्चे में नहीं होगी, उसी दिन उन्हें ईशान की पेंटिंग प्रतिभा का पता चला। 

५.  निकुम्भ सर ने ईशान के पिता को डिस्लेक्सिया के बारे में क्या कहा ?

उ.  निकुम्भ सर ने ईशान के पिता को बताया कि  डिस्लेक्सिया नाम की एक बीमारी में, बच्चों को शब्दों और अंकों की जटिल प्रक्रिया को समझने में मुश्किल आती है।  जो चीज़ें आम बच्चे जल्दी समझ जाते है, उन्हें समझने के लिए इन बच्चों पर ज़्यादा म्हणत करनी पड़ती है।  उनोहोने कहा कि  ईशान को दुर्भाग्यवश वही बीमारी है. अत: उसकी कनौ मियों को न कोसकर, उसकी प्रतिभा को निखारना चाहिए।

६  ऐसा क्यों कहा गया कि  :

क  यानि  जवाब हुआ टिं. लिख दिया आंसर शीट  पर. ईशान का तरीका तो यही था। 

उ  ऐसा हुआ क्योंकि टेस्ट में यह सवाल पूछा गया था कि  तीन गुणा  नौ कितने होते हैं।  ईशान को अंकों की प्रक्रिया समझ नहीं आती थी।  उसने अपनी बुद्धि से काम न लेकर यूँ ही तीन लिख दिया था। 

ख  जो मन में है, जो आपकी कल्पना में है, उसे कागज़ पर उतारो। 

उ  निकुम्भ सर ने ऐसा कहा क्यूंकि वे ड्राइंग के माध्यम से बच्चों की कल्पनाशीलता जानना चाहते थे।  वास्तव में जिस बच्चे में जितनी ज़्यादा कल्पनाशीलता होगी, वह उतना ही अच्छा कलाकार होगा। 

जीवनमूलयपरक प्रश्न उत्तर 
प्र   आज के विद्यार्थी पढ़ना नहीं चाहते, न ही कर्तव्यनिष्ठ और समर्पित अध्यापक ही हैं. ऐसे स्तिथि में शिक्षा का क्या होगा ? अपने विचार में लिखिए। 

उ  यह धारणा किसी ऐसे अध्यापक की हो सकती है, जो अकारण ही शिक्षार्थियों से नाराज़ है और अपने साथियों में भी जिसे कोई ख़ास लगाव नहीं है। 

ख  अध्यापकों की कर्तव्यनिष्ठा में कोई कमी नहीं आई है।  वे अपने विद्यार्थी को अधिक - से - अधिक ज्ञान देना चाहते हैं। 

ग.  हम सभी क्षेत्रों में निरंतर विकास कर रहें हैं. यह विकास कल के शिक्षार्थोयों के कारण ही संभव हुआ है और आगे भी आज के विद्यार्थियों द्वारा संभव होगा। 

घ.  आज विदेशों में इंजीनियरों, डॉक्टरों  और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों की खूब धाक बानी है। 

ङ  आज विषभर में विशेषकर एकदम ने, आइ. टी क्षेत्र में तो भारतीयों का कोई मुकाबला नहीं कर सकता। 

समाप्त। ………………………………………… 

सबकी दोस्त,

लक्ष्मी ! :-)))

Lesson - 13 Desh Prem Kaa Daam!

देशप्रेम का दाम

१.  यह कहानी ककब की है और भारत के किस राज्य की है?

इस कहानी में १९४२ के भारतीय आंदोलन का उल्लेख है।  यह उड़ीसा राज्य से सम्बंधित है।

२  नारायण बाबू बीमार बच्चे को छोड़कर क्यों ना जा सके ?

नारायण बाबू बीमार बच्चे को छोड़कर इसलिए न जा सके क्योंकि उनका ह्रदय पुत्र-स्नेह से द्रवित हो उठा था।

३ पत्नी की मृत्यु के बाद नारायण बाबू ने सनातन की परवरिश कैसे की ?

पत्नी की मृत्यु के बाद नारायण बाबू ने बड़ी कठिनाइयों से सनातन की परवरिश की।

  और बहु ने नारायण बाबू से कहाँ - कहाँ सिफारिश करने को कहा ?

नारायण बाबू के बेटे ने मंत्री से यूनियन की सिफारिश तथा बहु ने मातृ से ट्रांसफर  कैंसल करने के लिए कहा। 

दीर्घउत्तरीय प्रश्न उत्तर

१   नारायण बाबू कैसे पकड़ा गया ?

नारायण बाबू के बेटे तेज़ बुखार से तप रहा ठाट तथा सैदामिनी बेटे की हालत देखकर घबरा रही थी।  नारायण बाबू का ह्रदय पुत्र - स्नेह से पिघल गया।  पिता के वात्सल्य तथा कर्त्तव्य के आगे देशप्रेम हार गया। वे घंटेभर में वहां से चले जाने का निर्देश भूल गए. रातभर ठहरकर उन्हें तब ध्यान आया जब प्रात: पुलिस ने उनका मकान घेरकार्सिटी बजाई।

२   नारायण बाबू आधी रात में घंटे - दो घंटे के लिए ही क्यों घर आ पाते थे ?

नारायण बाबू अँगरेज़ सरकार के विरुद्ध जगजोग्रं के उद्देश्य से भूमिगत हो गए थे।  छद्मवेश में वे वेश बदलकर उड़ीसा के एक छोर  से दूसरे छोर  तक आज़ादी के लिए लोगों को जागरूक कर रहे थे।  अँगरेज़ सरकार ने उनपर हज़ार रूपये के इनाम की घोषणा की थी। इन्हीं कारणों से नारायण बाबू घंटे - दो घंटे के लिए ही घर आ पाते थे।

३  सनातन और मधुमिता नारायण बाबू से क्या अपेक्षा कर रहे थे ?

सनातन और मधुमिता नारायण बाबू से यह अपेक्षा कर रहे थे कि  वे देश को  बाद सरकार से पैसे मांगेंगे और उन पैसों को वे बांटकर सुखी जीवन जी सके, लेकिन नारायण बाबू ने सरकार से पैसे नहीं माँगे।

४  सनातन और मधुमिता के स्वभाव में आए परिवर्तन का क्या कारण था ? इससे उनके चरित्र के कौन - सा पक्ष उजागर होता है ?

जब दिल्ली से यह पात्र आया कि  केन्द्रीय सरकार ने नारायण बाबू को जीवनभर के लिए ५०० रुपए महीने का भत्ता देने का निर्णय कर लिया है तो सनातन और मधुमिता के स्वभाव में परिवर्तन आ गया।  इससे यह पता चलता है कि  आज के समय में पैसा ही सब कुछ है , रिश्ते - नातों का कोई मूल्य नाहिंन।  इससे यह भी पता चलता है कि  जो व्यक्ति अतीत के त्याग को पूंजी बनाकर वर्तमान के भोग की सामग्री नहीं जुटाता, उसे लोग असफल तथा असमर्थ ही मानते हैं।

५  आज़ादी के बाद देशवासियों का चरित्र क्यों बदल गया ? विस्तार में लिखिए।

स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वतन्त्र भारत की जो तस्वीर देखि थी, स्वतंत्रता मिल जाने के बाद, बदली हुई स्तिथियों में कोई अलग ही तस्वीर नज़र आई।  महात्मा गांधी के सपनों का भारत कहीं खो गया।  इसी कारण अनेक स्वतंत्रता सेनानी भी निजी स्वार्थ के खातिर देश की सत्ता हथियाने की सोचने लगे , जिस कारण वे चुनाव भी लड़ने लगे।

६  आपकी परतंत्र भारत में अंग्रेज़ों के प्रति क्या भूमिका होती ? आप देश के लिए क्या करते ?

हम अंग्रेज़ों द्वारा किए जा रहे अत्याचार और दमन का विरोध करते।  समाज के अनेक अंगों से उनके विरुद्ध जनमत तैयार करते।  असहयोग और सत्याग्रह  के द्वारा अपना विरोध प्रकट करते।  यदि परिस्थितियों की आवश्यकता होती तो क्रांति भी करते। 

 ऐसा क्यों कहा गया है कि  …। 

क.   नारायण नदास को अनुमान हो गया कि  बेटे के साथ सम्बन्ध इशी क्षण टूट गया। 

जब नारायण बाबू ने सनातन की इस बात से इंकार कर दिया कि  वे स्वतन्त्र सेनानी रह चुके श्रम मंत्री से उसकी यूनियन की सिफारिश नहीं करेंगे तो सनातन के क्रोधित होने पर उन्हें यह आभास हो गया कि  बेटे के साथ उनका सम्बन्ध टूट गया। 

ख.  अपने परिवार में नारायण दास बिलकुल नई:संग, अनावश्यक और फ़ालतू चीज़ की तरह उपेक्षित पड़े रहते। 

जब्ब नारायण बाबू ने अपनी बहु मधुमिता को स्पष्ट  कर  उसका ट्रांसफर  की मंत्री जी से सिफारिश नहीं  मधुमिता  अपनी ममता का   बंधन दूर कर लिया।  पुत्र सनातन तो पहले से ही क्रोधित हो कर सम्बन्ध तोड़ चुका था।  इस घटना के बाद वे बुल्कुल नई:संग, फ़ालतू चीज़ के जैसे पड़े थे। 

ग.  बहू की बात सुनकर नारायण दास की छाती में हुक - सी उठी।  तन-मन दर्द से भर गया। 

जब नारायण बाबू ने निर्लिप्त-भाव से मृत्यु से निडर होकर वरण करने की बात कही तो मधुमिता द्वारा यह बताने पर की सरकार ने उन्हें ५०० रुपए महीना भत्ता देना मंज़ूर किया है, उनके हृदय में हुक - सी उठी। 

जीवन मूल्य परक प्रश्न -उत्तर 

प्र।   हम सत्ता और शक्ति के पीछे क्यों दौड़ते रहते हैं ?

उ  देशप्रेम नई:स्वार्थ होता है।  सत्ता और शक्ति के पीछे दौड़नेवाले स्वार्थी होते हैं. उनका देशप्रेम दिखावा मात्र होता है।  वह हमें प्रभावित करने के किए होता है ताकि हम सत्ता तक पहुँचने में उनकी मदद करें।  इसलिए वे सत्ता में पहुँचते ही केवल अपने और अपनों के हित -साधन में जुट जाते हैं। 

वे हम जैसे को साक्षात तो दूर की बात, सपने में भी देखना पसंद नहीं करते।  दूसरी ओर  जो सच्चे देशप्रेमी होते हैं , उन्हें अपने या अपनों की कोई फ़िक्र नहीं होती। 

सच तो यह है कि  हम सभी ही उनके अपने होते हैं. वे तो सत्ता पाना ही नहीं चाहते।  इन दिनों हमारे बीच इसका जीता-जागता उदाहरण हैं - अन्ना हज़ारे। 

बस. ख़त्म। 

बाकी बाद में। 

सबकी दोस्त,

लक्ष्मी।  :-)))

तरुवर फल नहीं खात  है , सर्वर पियहि न पान। 
कहीं  रहीम परकाज हित , संपत्ति सँचहि सुजान। 

 

Saturday, 28 February 2015

Lesson - 12 Saarnaath!

पाठ - १२ 

प्र १   सारनाथ भारत के किस राज्य में है ?

उ.    सारनाथ भारत के उत्तर प्रदेश में स्तिथ है। 

प्र  .  सारनाथ की दो विशेषतायें बताइए। 

 उ  गौतम बुद्ध ने अपना धर्म चक्र प्रवर्तन यहीं पर किया था। . 

        यहाँ अशोक द्वारा निर्मित सिंह शीर्षवाला स्तम्भ, अनेक स्तूप तथा विहार है। 

प्र।   गौतम बुद्ध का सारनाथ से क्या सम्बन्ध था ?

उ   गौतम बुद्ध का सारनाथ से घनिष्ठ सम्बन्ध ठाट क्यूंकि उन्होंने अपना धर्म चक्र प्रवर्तन यहीं किया था। 

अशोक  स्तम्भ के विषय में अलग - अलग क्या मत थे ?

अशोक स्तम्भ के ऊपरी भाग को किसी विद्वान ने उलटा कमल का फूल कहा है , तो किसी ने फारस का घंटा कहा है।  इतिहासकारों ने इसे कला का उत्तम नमूना कहा है। 

दीर्घउत्तरीय प्रश्न - उत्तर 

१    बौद्ध धर्म की यह एक महान घटना -   किस घटना की बात की जा रही है ?

 करने के उद्देश्य से गौतम बुद्ध ने घर छोड़ दिया।   शिष्य बने किन्तु उनके ज्ञान प्राप्ति के मार्ग को गलत समझकर उन्हें बोधगया में अकेले छोड़कर भाग गए।   फिर तपस्या के बाद जब बुद्ध को  ज्ञान प्राप्ति हुई तो उन्होंने  उन्ही पांच शिष्यों को सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया।  यही बौद्ध धर्म की एक महान घटना थी। 

२।   सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म का अनुयायी बनने के बाद क्या किया ?

जब मौर्य सम्राट अशोक बौद्ध धर्म का अनुयायी बना तो सारनाथ, साँची, दिल्ली, कौशाम्बी, लुंबनी, वैशाली, लोरियानंदनगढ़ आदि स्थानों पर स्तम्भ बनवाए।  इनमे से सबसे प्रमुख अशोक स्तम्भ है। 

अशोक स्तम्भ की विशेषतायें विस्तार ममे लिखिए ?

इस स्तम्भ का शीर्ष भाग चार सिंहों से युक्त है।  सिंहों के मुंह  से विपरीत दिशा में हैं, किन्तु पीठ आपस में ऐसे सटी हैं मानो एक ही हों। 

 बीच में एक चक्र है जो धर्म चक्र का सूचक है। 
सिंहों की मूंछें, नेत्र, आयल और खुले हुए मुख अस्वाभाविक होते हुए भी प्रभावशाली है। 
चक्र के पास अश्व, मृग, सांड और हाथियों की मूर्तियां यहां खड़ी  हैं। 

३.  सिंह प्रतिमा की प्रशंसा करते हुए इतिहासकारों ने क्या कहा ?

इतिहासकारों ने सारनाथ की इस प्रतिमा को भूरि - भूरि प्रशंसा की है।  इनमे उच्च भावनाओं की झलक मिलती है।  इस स्तम्भ की विशेषता है कि  यह एक ही पत्थर से बन्नी है और इसे अत्यंत पॉलिश  की गई है।  यह पॉलिश  बाद की मूर्तिकला से हमेशा के लिए लुप्त हो गई है। 

४.  सारनाथ में मिली दो मूर्तियां की विशेषतायें बताइए। 

सारनाथ में मिली दो मूर्तियां है।  पहले वाली कनिष्क के काल की एक विशाल बोधिसत्व प्रतिमा है और दूसरी गुप्तकाल की एक सुन्दर धर्म चक्र प्रवर्तन की मुद्रा में भगवान बुद्ध की मूर्ति है।  यह बुद्ध की मूर्ति न केवल हमें न केवल बाहर से आकर्षित करती है बल्कि अपनी भीतरी सुंदरता से भी हमें आकर्षित करती है। 

५ अशोक स्तम्भ के कौन से चिह्न किन अलग - अलग रूप में उपयोग में लाए जाते हैं। 

अ  अशोक स्तम्भ के ऊपर बने चार शेर सरकार द्वारा जारी मुद्रित मुद्रा (सिक्कों तथा नोट) पर अंकित हैं। 
आ अशोक स्तम्भ के सिंहों के बीच बना चक्र तिरंगे झंडे के मध्य में स्तिथ है। 
ई अशोक स्तम्भ के ऊपर बने चार शेर सरकार प्रपत्रों पर अंकित होते हैं। 
ई इस स्तम्भ के ऊपर बने चार शेर सरकारी मुहर में अंकित होते हैं। 
उ सरकारी डाक - टिकट पर भी इस स्तम्भ के ऊपर बने चार शेर अंकित होतें हैं। 
उ अशोक स्तम्भ का चक्र तीनों सेनाओं के सैनिकों की वर्दी पर भी अंकित हैं। 

जीवन मूल्य परक प्रश्न 

आप अशोक होते तो प्रजा के लिए क्या कुछ करते ? लिखिए  स्मृति बनाए रखने के लिए आप क्या - क्या करते ?

 मैं अशोक होता तो आरम्भ से ही अहिंसा धर्म का पालन करता।  सम्राट का पद पाने के लिए युद्धों में वीरों का खून न बहाता।  तब उन युद्धों के खर्च के लिए प्रजा को अतिरिक्त करों का भार धोने पर मजबूर नहीं होना पड़ता।  नै पीढ़ी को शिक्षित करने के लिए स्मारकों के स्थान पर पाठशालाएं बनवाता।  शिलालेखों के स्थान पर विद्या से सम्बंधित कुछ खुदवाता। 

सबकी दोस्त ,

लक्ष्मी :-)))

Thursday, 29 January 2015

Hindi - Grammar Bit!

Page - 127

व्याकरण

अपराध  -  crime

पाप  - sin

अपराध जाने या अनजाने में हो सकता है।  उसका दंड निश्चित है, किन्तु पश्चाताप और दंड के भुगतने से ख़त्म हो जाता है किन्तु , पाप किसी की नज़र में आए या ना आए वह पश्चाताप करने या दंड भुगतने पर भी नहीं मिटता।

हत्या करना अपराध है पर किसी को बहुत दुःख देना पाप है। 

अमूल्य - priceless

बहुमूल्य - expensive

जीवन अमूल्य है वरन हीरा बहुमूल्य  है।

आज्ञा - order  given  by  a  loved  one  or  a respectable person .

आदेश - order  which is compulsory to follow .

गुरु या बड़ों की आज्ञा , सरकारी आदेश

राजा - king

सम्राट - emperor

अकबर भारत के सम्राट थे उनके राज्य के अधीन कई राजाओं का राज्य था।

2.

हुक्म  -  आदेश

लाश -  शव

लफ्ज़  -  शब्द

शाही  -  राजसी

तबीयत   - स्वास्थ्य

हिफाज़त - सुरक्षा

नापाक - अपवित्र

हकीम  - सभी ठीक हैं

 

Thursday, 20 November 2014

Lesson - 11 Bhaarat Gaan

भारत - गान

मौखिक प्रश्न  - उत्तर
 
क.  ' सारे जगत को अपना परिवार मानता है'.
ख.  'धरती पर स्वर्ग की कल्पना है यदि कहीं पर'.
ग.  ' दे चंद्रयान नारा अपना महान भारत ' . '

उ.  क.  'वसुधैव कुटुम्बकम' यानी पूरा विश्व ही एक कुटुंब है , कुम्बा है, परिवार है. ऐसा भारतीय लोग तब कल्पित कर चुके थे जब ' ग्लोबल विलेज' या 'ग्लोबलाइज़ेशन ' जैसा शब्द किसी के ध्यान में न आए होंगे. विश्वग्राम और वैश्वीकरण के बारे में किसी ने सोचा तक ना था।

ख. ऐसा कहा और माना जाता है कि  स्वर्ग में सब सुख होते हैं।  हरियाली होती है, झीलें होती है, फूलों से लड़े बाग़ होते हैं।  देवता शिकारों में बैठ कर जल - विहार करते हैं. यह सब स्वर्ग के रूप में कश्मीर में है।  सो कह सकते हैं कि  धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है, तो वह कश्मीर में है।

ग.  भारत का चंद्रयान नामक अंतरिक्षयान चन्द्रमा तक पहुँचने में सफल रहा है।  इससे दुनिया को अंतरिक्ष विज्ञान क्षेत्र में हमारी क्षमताओं का पता चल गया।  वह दिन दूर नहीं अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धानिक, वैज्ञानिक, अन्य ग्रहों तक अंतरिक्ष यान  भेजेंगे।

दीर्घउत्तरीय प्रश्न उत्तर

१.  भारत को' धरती का स्वर्ग' क्यों कहा जाता है ?

उ.  भारत की भौगोलिक स्तिथि, सांस्कृतिक वैभव, ऋतू - परिवर्तन , रीती - रिवाज़ आदि की उत्कृष्टता, इसे अन्य देशों से अलग स्थापित करती है।  यहां अनेक नदिया धरती को उर्वर बनाए रखती हैं , तो पर्वत श्रृंखलाएँ  ऋतू - चक्र को प्रभावित करती हैं।  यहां की भौतिक और बौद्धिक सम्पदा से पाश्चात्य देश सदा आकर्षित होते रहे हैं।  यहां के प्राकृतिक दृश्य सहज ही सब का मन मोह लेते हैं।  इसी आधार पर भारत को धरती का स्वर्ग कहा गया है। 

२.  हमें किनका ऋणी होना चाहिए और क्यों ?

उ.  कविता के आधार पर कहा जा सकता है कि  जिस किसी ने भी भारत को समृद्ध करने के लिए अपना बलिदान दिया, हमें उन सबका ऋणी होना चाहिए. जैसे सैनिक, वैज्ञानिक, राजनितिक, विचारक, दार्शनिक आदि।

३.  'जल, जीव और जीवन-संभावना शशि पर' भावार्थ स्पष्ट कीजिए।

उ.  इससे कवि ने चंद्रयान के माध्यम से भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों की ओर  संकेत किया है।  वे कहना चाहते हैं कि  वह दिन दूर नहीं जब हमारे वैज्ञानिक चन्द्रमा पर जा-जीव और जीवन खोजकर बस्तिया बनाने में सफल होंगे। 

४.  कल्पना और सुनीता कौओं हैं ?

उ.  कल्पना चावला करनाल की रहने वाली थीं।  वे 'नासा' की ओर  से एक बार अंतरिक्ष में हो आई थीं।  वे अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला बनीं।  उन्हें पुन : स्पेस में जाने के लिए चुना गया था।  दुर्भाग्यवश  दूसरी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान अंतरिक्षयान के क्षतिग्रस्त हो जाने से उनकी मृत्यु हो गई।  इसी प्रकार सुनीता विलियम्स चाँद पर कदम रखने वाली दूसरी भारतीय्या महिला थीं। 

जीवनमूल्यपरक प्रश्न - उत्तर

१.  भारत के नागरिक होने के कारण आपके कुछ अधिकार भी हैं तो कर्त्तव्य और ज़िम्मेदारी भि. आप उन्हें कैसे पूरा करना चाहेंगे ?

उ.  किसी भी नागरिक को उसके देश का संविधान कुछ मौलिक अधिकार देता है तो उससे कुछ कर्तव्यों का पालन करने की आशा भी करता है।  भारत का नागरिक होने के नाते मुझे छ : मौलिक अधिकार प्राप्त हैं, जिनका मैं निर्भय होकर  उपयोग कर सकता हूँ।  इसी के साथ मेरे कुछ कर्त्तव्य भी हैं , जैसे , अपने राष्ट्रीय रतिकों का सम्मान करना , अपने संविधान की मर्यादा का पालन करना, अपने किसी भी कार्य से अपने राष्ट्र की छवि धूमिल होने का अवसर न देना , देश में आतंरिक अमन - शान्ति बनाए रखने में अपना योगदान देना, राष्ट्रीय संपत्ति को क्षति न पहुंचाना. सुसभ्य नागरिक की तरह आचरण करके और शांतिप्रिय सहरी की तरह  जीवनयापन करना चाहिए। 

बस ख़त्म।

सबकी दोस्त ,

लक्ष्मी आर श्रीनिवासन।  :-)))

Tuesday, 4 November 2014

Hindi Lesson - 9 Beej Paudhe kaa Janm!

 
बीज पौधे का जन्म 
 
मौखिक प्रश्न उत्तर 
 
 
प्र।  १   वर्षा और बीज का क्या सम्बन्ध है?
 
उ  १  वर्षा और बीज का घनिष्ठ सम्बन्ध है।  वर्षा के होने पर ही बीज अंकुरित होतें हैं। 
 
प्र   २  लेखक ने अंकुर की तुलना किस्से और क्यों की है ?
 
उ  २  लेखक ने अंकुर की तुलना शिशु से की है क्योंकि जिस प्रकार मानव का सबसे छोटा रूप शिशु है, उसी प्रकार अंकुर भी पौधे का सबसे छोटा रूप है। 
 
प्र   ३  पेड़ के शरीर में 'रास' कैसे पहुंचता है ?
 
उ  ३  पेड़ के शरीर में 'रस' जड़ द्वारा मिट्टी  से होकर पहुंचता है। 
 
प्र   ४  फूलों के घनिष्ठता किन - किन चीज़ों से है?
 
उ  ४  फूलों की घनिष्ठता मधुमक्खियों तथा तितलियों से है। 
 
प्र   ५  पौधा अन्धकार से प्रकाश की ओर  ही कइयों बढ़ता है ?
 
उ  ५  पेड़ - पौधे सूर्य  से ऊर्जा लेकर ही पल्लवित होतें हैं।  इसलिए वे अन्धकार से प्रकाश की ओर  ही बढ़ते हैं। 
 

दीर्घउत्तरीय प्रश्न उत्तर 
 
प्र   १  पौधे को औंधा क्यों लटकाए रखा गया ?
 
उ  १  परीक्षण करने के लिए गमले को औंधा लटकाए रखा गया।  परीक्षण यह जांचने के लिए था कि  जड़ों का विकास निचे की ओर  तथा तने का विकास ऊपर की ओर  ही होता है। 
 
प्र   २  पेड़ - पौड़ी किस प्रकार का भोजन करते हैं ?
 
उ  २  पेड़ - पौधे तरल द्रव्य या वायु से  भोजन ग्रहण करते हैं।  वे जड़ द्वारा माटी से रास पान करते हैं।  माटी में पानी डालने पर उसकी भीतर बहुत - से तरल द्रव्य गाल जाते हैं।  पेड़ - पौधे वे तमाम द्रव्य सोख लेते है तथा उसी द्रव्य से पोषित होते हैं। 
 
प्र   ३  आहार ग्रहण करने में पेड़ के पत्ते किस प्रकार मदद करते हैं ?
 
उ  ३   पत्तों में अनगिनत छोटे - छोटे मुंह होते हैं।  सूक्ष्मदर्शी यन्त्र की सहायता से अनगिनत मुंह पर अनगिनत होंठ  दिखाई पडतें हैं।  जब पेड़ को आहार की आवश्यकता होती है , तब इनके अनगिनत होंठ खुल जातें है तथा पेड़ पत्ते से आहार ग्रहण करते हैं। 
 
प्र   ४  अंगारक वायु सभी जीव - जंतुओं के लिए हानिकारक है , क्यों ?
 
उ  ४  जब हम श्वास - प्रश्वास ग्रहण करते हैं तब प्रश्वास के साथ विषाक्त वायु बाहर निकलती है , जिसे 'अंगारक वायु' कहते हैं।  यह अंगारक वायु ज़हरीली होने के कारण जीव - जंतुओं के लिए घातक होती है, क्युकी इसके सेवन से वे नष्ट होते हैं। 
 
प्र   ५  पेड़ - पौधे अंगारक वायु को कैसे शुद्ध करते हैं ?
 
उ  ५  पेड़ के पत्तों पर जब सूर्य का प्रकाश पड़ता है , तब पत्ते सूर्य - ऊर्जा के सहारे अंगारक वायु से अंगार समाप्त का डालते हैं।  वहीँ अंगार पेड़ के शरीर में प्रवेश करके उसके विकास में मदद करती है।  इस प्रकार पेड़ - पौधे अंगारक वायु का सेवन करके हमें शुद्ध वायु देते हैं। 
 
प्र   ६  मधुमक्खी के आगमन से पौधों का उपकार कैसे होता है ?
 
उ  ६  मधुमक्खियां एक फूल के परागकण दुसरी फूल ले जाते हैं।  इन पराग कानों के मिलने से ही बीज पकता है।  बीज पकने पर ही नया पौधा जन्म लेता है।  अत: यह कहा जा सकता है कि  मधुमक्खियों के आगमन से पेड़ - पौधों का उपकार होता है। 
 
प्र   ७  ऐसा क्यों कहा गया ही कि  ;
 
क  जड़ नीचे  की ओर  जाएगी और तना ऊपर की ओर  उठेगा ?
 
उ  ऐसा इसलिए कहा गया है क्यूंकि, यह प्रकृति का नियम है कि  पौधे प्रकाश की ओर  ही बढ़ते हैं। 
 
ख  सोचकर देखा जाए तो हम भी प्रकाश की खुराक पाने पर ही जीवित हैं। 
 
उ  सूर्य का प्रकाश प्राणदायी होता है।  हमारे द्वारा खाया जाने वाला अनाज और सब्ज़ियाँ  सूर्य की प्रकाश से ही उपजती हैं।  इसलिए यह कहा गया है कि  हम भी सूर्य की खुराक पाने आर ही जीवित हैं। 
 
ग  ममता का पाससे पाते ही मानो माटी और अंगार फूल बन जाते हैं। 
 
उ  फूलों में ही पेड़ - पौधों की संतान - बीज पलते  हैं।  जब वे बढ़ते हैं तो मानो ऐसा लगता है कि  पेड़ द्वारा सेवन की गई माटी और अंगार ममता से सराबोर होकर फूल बन गए हों। 

सबकी दोस्त ,

लक्ष्मी।  :-)))