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Happiness is in helping others! Hi! Iam Lakshmi. I started this blog to help all my friends who are busy, working parents and have little or NO time to teach their kids! :-) Now, everyone can benefit from whatever little I have to share. This is a blog on three languages, English, Hindi & Sanskrit, designed especially for kids studying 8th grade at BSRKV, Sainikpuri. I hope to help as long as its possible! :-)))
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Tuesday, 27 January 2015
homecoming!
Dear friends!
Finally! My darling computer is coming back! So, I can hope to upload the required lessons @ earliest!
Everyone's friend,
Lakshmi! :-)
Finally! My darling computer is coming back! So, I can hope to upload the required lessons @ earliest!
Everyone's friend,
Lakshmi! :-)
Saturday, 17 January 2015
Hindi FA - 4 vyaakaraN
ज्ञान प्राप्ति - ज्ञान की प्राप्ति
धर्म - चक्र - धर्म का चक्र
वनगमन - वन को गमन
गुणहीन - गुण से हीन
पवनपुत्र - पवन का पुत्र
देशप्रेम - देश से प्रेम
परलोक को गमन - परलोकगमन
गुरु के लिए व्यय - गुरुव्यय
गंगा का जल - गंगाजल
अकाल से पीड़ित - अकालपीड़ित
ऋण से मुक्त - ऋणमुक्त
नगर में वास - नगरवास
फूल - कमल
हाथी - हरित
घर - ग्रह
सिंह - शावक
अश्व - सरपट
नेत्र - नयनतारा
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
व्याकरण - बोध
क। सज्जन मान जाते हैं।
ख आप सपरिवार हमारे घ आइए।
ग दूध स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
घ राम सीता को देखकर प्रसन्न हुए।
ङ यदि वेतन मिले तो मैं रुपए लौटा दूंगा।
आदर - सादर , अनादर निरादर
कर्म - कर्मठ , दुष्कर्म , निष्कर्म
ज्ञान - विज्ञान , ज्ञान , ज्ञानी
तंत्र - परतंत्र , स्वतन्त्र , तांत्रिक
Everyone's friend,
Lakshmi R. Srinivasan. :-)))
धर्म - चक्र - धर्म का चक्र
वनगमन - वन को गमन
गुणहीन - गुण से हीन
पवनपुत्र - पवन का पुत्र
देशप्रेम - देश से प्रेम
परलोक को गमन - परलोकगमन
गुरु के लिए व्यय - गुरुव्यय
गंगा का जल - गंगाजल
अकाल से पीड़ित - अकालपीड़ित
ऋण से मुक्त - ऋणमुक्त
नगर में वास - नगरवास
फूल - कमल
हाथी - हरित
घर - ग्रह
सिंह - शावक
अश्व - सरपट
नेत्र - नयनतारा
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
व्याकरण - बोध
क। सज्जन मान जाते हैं।
ख आप सपरिवार हमारे घ आइए।
ग दूध स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
घ राम सीता को देखकर प्रसन्न हुए।
ङ यदि वेतन मिले तो मैं रुपए लौटा दूंगा।
आदर - सादर , अनादर निरादर
कर्म - कर्मठ , दुष्कर्म , निष्कर्म
ज्ञान - विज्ञान , ज्ञान , ज्ञानी
तंत्र - परतंत्र , स्वतन्त्र , तांत्रिक
Everyone's friend,
Lakshmi R. Srinivasan. :-)))
Exercises
1.
(i) जलमन्नंसुभाषितम्
(ii ) शुष्कवृक्षाश्च मूर्खाश्च
(iii ) व्यसनेन , निद्रा, कलहेन
(iv ) यस्य दानवती लक्ष्मी
(v ) फलन्ति वृक्षा:, गुणिनो जना :
2.
(i ) त्रीणि
(ii ) लोचनाभ्याम्
(iii ) गुणिनो
(iv ) धीमताम
(v ) शुष्कवृक्षाश्च , मूर्खश्च
(vi ) पाषाणखण्डेषु
3 .
(i ) रत्नानि
(ii ) रत्नसंज्ञा
(iii ) प्रज्ञा
(iv ) वृक्षा:
(v ) धीमताम
४.
प्रज्ञा - बुद्धि:
नेत्राभ्याविदुषाम्
मूर्खे :
विदुषाम्
मधुरा
धरायाम्
5 .
मूढै : - सप्तमी एकवचनम्
लोचनाभ्याम् - चतुर्थी द्विवचनम्
विहीनस्य - षष्ठी एकवचनम्
वृक्षा: - प्रथमा बहुवचनम्
निद्रया - तृतीया एकवचनम्
6 .
धीमताम कालो गच्छति काव्यशास्त्राविनोदेन
व्यसनेन च मूर्खानाम् निद्रया कलहेन वा।
Everyone's friend,
Lakshmi R. Srinivasan . :-)))
(i) जलमन्नंसुभाषितम्
(ii ) शुष्कवृक्षाश्च मूर्खाश्च
(iii ) व्यसनेन , निद्रा, कलहेन
(iv ) यस्य दानवती लक्ष्मी
(v ) फलन्ति वृक्षा:, गुणिनो जना :
2.
(i ) त्रीणि
(ii ) लोचनाभ्याम्
(iii ) गुणिनो
(iv ) धीमताम
(v ) शुष्कवृक्षाश्च , मूर्खश्च
(vi ) पाषाणखण्डेषु
3 .
(i ) रत्नानि
(ii ) रत्नसंज्ञा
(iii ) प्रज्ञा
(iv ) वृक्षा:
(v ) धीमताम
४.
प्रज्ञा - बुद्धि:
नेत्राभ्याविदुषाम्
मूर्खे :
विदुषाम्
मधुरा
धरायाम्
5 .
मूढै : - सप्तमी एकवचनम्
लोचनाभ्याम् - चतुर्थी द्विवचनम्
विहीनस्य - षष्ठी एकवचनम्
वृक्षा: - प्रथमा बहुवचनम्
निद्रया - तृतीया एकवचनम्
6 .
धीमताम कालो गच्छति काव्यशास्त्राविनोदेन
व्यसनेन च मूर्खानाम् निद्रया कलहेन वा।
Everyone's friend,
Lakshmi R. Srinivasan . :-)))
Lesson - 11
पृथ्वी पर तीन रत्न उपलब्ध हैं - जल, अनाज और मधुर वचन, किन्तु मानव जाति पत्थर यानि बहुमूल्य रत्नों के पीछे दौड़ता है।
भावार्थ : मनुष्य जीवन में बहुत अनमोल जल, अन्न और मधुर वचन या पुस्तक यानि अच्छे सीख देने वाले शास्त्र हैं, किन्तु मनुष्य धन जुटाने की होड़ में है।
जिस व्यक्ति को स्वबुद्धि न हो उसका शास्त्र से क्या लेना - देना ? जिस तरह एक नेत्रहीन व्यक्ति के हाथों में दर्पण हो।
भावार्थ : मनुष्य की सबसे बड़ी उपलब्धि है, स्वयं के बारे में ज्ञान, इसका अर्थ यह है कि जिसने स्वयं की कमज़ोरियों पर विजय प्राप्त नहीं किया उसका शास्त्र पठन से या विद्या प्राप्त करने से कोई लाभ नहीं।
फलों से लड़े पेड़ झुकते है, सर्वगुण संपन्न व्यक्ति आदर में झुकते हैं , किन्तु सूखे हुए पेड़ और मूढ़ व्यक्ति कभी नहीं झुकते। ,
भावार्थ : जिस तरह मीठे पके हुए फलों से लड़े वृक्ष अपने भार के कारण झुकते है, उसी तरह सभी सत गुणों से सुसज्जित व्यक्ति , जिसमे अहम की भावना न हो वह भी समयानुसार झुक कर कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करता है. परन्तु सूखे हुए वृक्ष जिसमे अब कभी फल नहीं लग सकते उनमे झुकने की संभावना कदापि नहीं, उसी तरह मुर्ख व्यक्ति यानि कि व्यक्ति जिसमे अहंकार हो वह कभी किसी के सामने नहीं झुकता।
विद्वानों का समय काव्य, शास्त्र आदि के पठन में जाता है, किन्तु मुर्ख, अज्ञानियों का समय झगड़ों में, दुष्कर्मों में और निद्रा में व्यतीत होता है।
भावार्थ: सज्जन व्यक्ति अपना समय सत्कर्मों में और दुर्जन दुष्कर्मों में बिताते हैं।
वाणी की मधुरता प्रयत्न के साथ - साथ बढ़ती है , जिस प्रकार धन के दान से जीवन सफल होता है।
भावार्थ: कोई भी कार्य प्रयत्न के द्वारा सफल होती है उस प्रकार धन दान करने से अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है। धन जुटाना कोई बड़ी बात नहीं , उसे दान करना भी आना चाहिए।
सबकी दोस्त ,
लक्ष्मी आर। श्रीनिवासन। :)))
भावार्थ : मनुष्य जीवन में बहुत अनमोल जल, अन्न और मधुर वचन या पुस्तक यानि अच्छे सीख देने वाले शास्त्र हैं, किन्तु मनुष्य धन जुटाने की होड़ में है।
जिस व्यक्ति को स्वबुद्धि न हो उसका शास्त्र से क्या लेना - देना ? जिस तरह एक नेत्रहीन व्यक्ति के हाथों में दर्पण हो।
भावार्थ : मनुष्य की सबसे बड़ी उपलब्धि है, स्वयं के बारे में ज्ञान, इसका अर्थ यह है कि जिसने स्वयं की कमज़ोरियों पर विजय प्राप्त नहीं किया उसका शास्त्र पठन से या विद्या प्राप्त करने से कोई लाभ नहीं।
फलों से लड़े पेड़ झुकते है, सर्वगुण संपन्न व्यक्ति आदर में झुकते हैं , किन्तु सूखे हुए पेड़ और मूढ़ व्यक्ति कभी नहीं झुकते। ,
भावार्थ : जिस तरह मीठे पके हुए फलों से लड़े वृक्ष अपने भार के कारण झुकते है, उसी तरह सभी सत गुणों से सुसज्जित व्यक्ति , जिसमे अहम की भावना न हो वह भी समयानुसार झुक कर कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करता है. परन्तु सूखे हुए वृक्ष जिसमे अब कभी फल नहीं लग सकते उनमे झुकने की संभावना कदापि नहीं, उसी तरह मुर्ख व्यक्ति यानि कि व्यक्ति जिसमे अहंकार हो वह कभी किसी के सामने नहीं झुकता।
विद्वानों का समय काव्य, शास्त्र आदि के पठन में जाता है, किन्तु मुर्ख, अज्ञानियों का समय झगड़ों में, दुष्कर्मों में और निद्रा में व्यतीत होता है।
भावार्थ: सज्जन व्यक्ति अपना समय सत्कर्मों में और दुर्जन दुष्कर्मों में बिताते हैं।
वाणी की मधुरता प्रयत्न के साथ - साथ बढ़ती है , जिस प्रकार धन के दान से जीवन सफल होता है।
भावार्थ: कोई भी कार्य प्रयत्न के द्वारा सफल होती है उस प्रकार धन दान करने से अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है। धन जुटाना कोई बड़ी बात नहीं , उसे दान करना भी आना चाहिए।
सबकी दोस्त ,
लक्ष्मी आर। श्रीनिवासन। :)))
Friday, 9 January 2015
Hi!!!! :-)
A very happy, peaceful, progressive & prosperous NEW YEAR 2015 to all of you!
:-)))
I'm extremely sorry as my computer is still on a vacation with its doctor!
Hopefully, i'll start uploading the portions quite soon!
With lots of love,
Everyone's friend,
Lakshmi R. Srinivasan.
:-)))
I'm extremely sorry as my computer is still on a vacation with its doctor!
Hopefully, i'll start uploading the portions quite soon!
With lots of love,
Everyone's friend,
Lakshmi R. Srinivasan.
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